नोएडा (जेएनएन)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदूषण को लेकर न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर प्राइवेट लिमिटेड को कड़ी फटकार लगाई है। एनजीटी ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदूषण की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं है। उद्योगों को हर हाल में पर्यावरणीय अधिनियमों का पालन करना होगा। न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर उद्योग के प्रतिनिधियों ने उत्पादन बहाल करने को लेकर एनजीटी में अपना पक्ष रखा। इस दौरान प्रतिनिधियों ने लंबी बहस की और अपने पक्ष में तमाम दलीलें दी। मामले पर एनजीटी ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

उल्लेखनीय है कि एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई जांच में आठ उद्योगों को प्रदूषणकारी तत्वों के उत्सर्जन का दोषी पाया गया था, जिनको यूपीपीसीबी द्वारा पिछले दिनों ही बंद करा दिया गया है। बंद कराए गए उद्योगों में शामिल इकोटेक स्थित न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर प्राइवेट लिमिटेड एक बड़ा नाम है।

ज्यादा पाई गई मर्करी की मात्रा
सीपीसीबी द्वारा की गई जांच में उद्योग द्वारा उत्सर्जित जल में मर्करी की मात्रा निर्धारित से करीब पांच गुना ज्यादा पाई गई, जिसे गंभीर मामला मानते हुए एनजीटी ने उद्योग के खिलाफ बंदी आदेश जारी किया। 

'आप' विशेष नहीं, लगाई फटकार
बहस के दौरान न्यू हॉलैंड उद्योग के प्रतिनिधि बार-बार दोबारा जांच की बात कह रहे थे, जिस पर एनजीटी ने कहा कि आप विशेष नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सीपीसीबी की टीम ने उद्योग की विधिवत जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है तो फिर दोबारा जांच क्यों कराई जाए। फैसला जानने को लेकर भी औद्योगिक प्रतिनिधियों में बेताबी दिखी, जिस पर कोर्ट ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के बाद आदेश जारी कर दिया जाएगा और एनजीटी की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा। उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि बंदी आदेश के बाद कंपनी के अंदर कर्मचारी प्रवेश भी नहीं कर पा रहे हैं, जिस पर कोर्ट ने कहा कि उत्पादन ठप किया गया है। कर्मचारियों को प्रवेश करने से किसी ने नहीं रोका।

यूपीपीसीबी के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे उद्योग

सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की अनुशंसा पर यूपीपीसीबी (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) द्वारा बंद कराए गए उद्योगों के प्रतिनिधि अब अपना पक्ष उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष रखेंगे। औद्योगिक प्रतिनिधियों की तरफ से संतोषजनक दलील मिलने पर यूपीपीसीबी बंद कराए गए उद्योगों को बहाल कर सकता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बंद कराए गए ज्यादातर उद्योग यूपीपीसीबी की शरण में जा चुके हैं। वहीं, यूपीपीसीबी भी उद्योगों के आवेदन पर विचार करते हुए उनको सुधार के लिए समय दे सकता है।

हरनंदी में बढ़ रहा था प्रदूषण

बंद कराए उद्योगों में से ज्यादातर को जल प्रदूषण करने का दोषी पाया गया है। उद्योगों से निकलने वाले जल में मर्करी सरीखे हानिकारक तत्व शामिल हैं, जिनसे मुख्य रूप से हरनंदी के जल प्रदूषण में खासी बढ़ोतरी हो रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से राष्ट्रीय हरित अधिकरण, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नदियों की स्वच्छता को लेकर विशेष कवायद की जा रही है।

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