नई दिल्ली, जेएनएन। थैलेसीमिया के मरीजों की परेशानी जल्‍द ही कम होने वाली है। इसको लेकर हुए रिसर्च में जो नई दवा सामने आई है वह मरीजों के कष्‍ट को कम करने में जरूर मददगार साबित होंगे। रक्त विकार की बीमारी थैलेसीमिया के इलाज के लिए एक नई दवा विकसित हुई है। विदेश में हुए उसके क्लीनिक परीक्षण के नतीजे उत्साहजनक हैं। यह दवा थैलेसीमिया के इलाज में वरदान साबित होगी, क्योंकि इसके इस्तेमाल से मरीजों को खून चढ़ाने की जरूरत बहुत कम हो जाएगी। यह बात थैलेसीमिया की बीमारी पर लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज में आयोजित सम्मेलन में सामने आई।

रोकथाम पर जोर
नेशनल थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी ने इसका आयोजन किया। इस सम्मेलन में लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज के अलावा देश के कई चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से संबंधित विभाग के अधिकारी व कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान डॉक्टरों ने बीमारी की रोकथाम के लिए स्क्रीनिंग पर जोर दिया। साथ ही इलाज की नई दवा और तकनीकों पर भी चर्चा की।

खून की कमी को दूर करने में सक्षम
सोसायटी के महासचिव डॉ. जेएस अरोड़ा ने बताया कि एक नई दवा 'लसपेटेरसेप्ट' पर शोध चल रहा है। यह दवा मरीज में खून व आयरन की कमी दूर कर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सक्षम है। क्लीनिकल परीक्षण के दौरान मरीजों को 12 सप्ताह तक हर तीन सप्ताह पर मरीजों को पांच खुराक दवा दी गई।

परिणाम काफी उत्‍साहजनक
इस दौरान यह देखा गया कि 16 मरीजों (67) फीसद मरीजों में खून चढ़ाने की जरूरत 50 फीसद तक कम हो गई। काफी मरीजों में खून चढ़ाने की जरूरत 33 फीसद तक कम हो गई, क्योंकि दवा खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने में सक्षम है। हर राज्य में खुलेंगे उत्कृष्ट सेंटर सम्मेलन में शामिल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में ब्लड सेल के कोऑर्डिनेटर विनीता श्रीवास्तव ने इस बीमारी की रोकथाम व इलाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे उपायों की जानकारी दी।

सुधारनी होगी ब्‍लड बैंकों की स्‍थिति
उन्होंने बताया कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सरकारी ब्लड बैंकों की स्थिति सुधारने के अलावा कोल इंडिया से समझौता किया गया है। इसके तहत अब तक 81 बच्चों का बोन मैरो प्रत्यारोपण हो चुका है, जो मौजूदा समय में इस बीमारी का स्थायी इलाज है। सरकार बोन मैरो प्रत्यारोपण को बढ़ावा दे रही है।

रेफरल सेंटर खोलने पर विचार
इसके अलावा हर राज्य में विशिष्ट सेंटर शुरू करने पर विचार चल रहा है, जो रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करेगा। हालांकि इस योजन को अमल में लाने में कुछ चुनौतियां हैं। हरियाणा में स्क्रीनिंग करेंगे लेडी हार्डिग के डॉक्टर लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. राजीव गर्ग ने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम को बढ़ावा देने के लिए संस्थान के डॉक्टर हरियाणा के एक जिले में स्क्रीनिंग करेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार से संस्थान को शोध परियोजना मिली है। जेनेटिक बीमारियों के इलाज का खुलेगा केंद्र थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है। यदि माता-पिता दोनों में यह जीन हो तो बच्चों में यह बीमारी होने का खतरा रहता है।

देश में पांच करोड़ थैलेसीमिया से पीड़ित
देश में करीब पांच करोड़ लोगों में थैलेसीमिया का जीन है। इस वजह से हर साल देश में 10,000-12,000 बच्चे थैलेसीमिया बीमारी के साथ जन्म लेते हैं। इसके अलावा बच्चों में कई अन्य तरह की जन्मजात बीमारियां होती हैं। इसके मद्देनजर लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज में भी बच्चों की जन्मजात बीमारियों के इलाज का केंद्र जल्द खुलेगा।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस