यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिल्ली में क्या-क्या लेकर आती है मानसून की बारिश, इससे शहर को कितना नुकसान? एक क्लिक में पढ़ें सबकुछ
दिल्ली में बारिश राहत के साथ जलभराव और ट्रैफिक जाम लाती है। हर साल भारी मात्रा में वर्षा जल बर्बाद ...और पढ़ें

HighLights
- बारिश से दिल्ली में जलभराव
- भूजल स्तर में भारी गिरावट
- नागरिकों की लापरवाही बनी कारण
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में बारिश न सिर्फ गर्मी से राहत दिलाती है बल्कि जलभराव और ट्रैफिक जाम की त्रासदी भी साथ लेकर आती है। इस साल हुई दो बेमौसम भारी बारिश ने राजधानी से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग समेत दिल्ली के घने इलाकों की सड़कों को तालाब में तब्दील कर दिया है।
हर बारिश में दिल्ली की सड़कें और इलाके जलमग्न हो जाते हैं। मौसम विभाग के मुताबिक हर साल 800 मिमी बारिश और 1.484 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली दिल्ली में औसतन 118.72 अरब लीटर बारिश होती है, जिसमें से सिर्फ दो से ढाई अरब लीटर वर्षा जल का ही रेनवाटर हार्वेस्टिंग के जरिए संग्रह हो पाता है।
बाकी 116 अरब लीटर कीमती वर्षा जल सड़कों और नालों में बहकर बर्बाद हो जाता है। दिल्ली में रेन वाटर हार्वेस्टिंग (आरडब्ल्यूएच) के पिछले पांच साल के आंकड़े और नागरिकों की लापरवाही इस बात की गवाही देती है कि दिल्ली जल संकट के कगार पर है और हम अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाह हैं।
यही वजह है कि दिल्ली का भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में भूजल स्तर दो मीटर नीचे चला गया है। पिछले दस से पंद्रह सालों में दिल्ली का भूजल स्तर 10 से 20 मीटर नीचे चला गया है। अगर हम अभी नहीं जागे तो पानी के लिए तरसना राष्ट्रीय राजधानी की नियति बन जाएगी।
पांच साल, वही हालात
दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रिपोर्ट बताती है कि 2020 से 2025 तक दिल्ली में आरडब्ल्यूएच सिस्टम की स्थिति दयनीय रही। 2020 में चार हजार इमारतों में सिस्टम लगाए गए, लेकिन 60 फीसदी से ज्यादा खराब पड़े रहे।
2022 में एनजीटी ने खुलासा किया कि 70 फीसदी इमारतों में या तो आरडब्ल्यूएच सिस्टम नहीं था या फिर काम नहीं कर रहा था। 2023-24 में ढाई हजार नए सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सिर्फ 1200 ही पूरे हो पाए। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने 2025 में कहा था कि गंदगी और टूटी पाइपलाइनों के कारण 50 फीसदी सिस्टम बेकार हैं। ऐसे में आरडब्ल्यूएच की अवधारणा कैसे सफल होगी, दिल्ली का भूजल स्तर कैसे बढ़ेगा।
नागरिकों की लापरवाही, नियमों की अनदेखी
- दिल्ली में 100 वर्ग मीटर से बड़ी इमारतों के लिए आरडब्ल्यूएच अनिवार्य है। लेकिन, 70 फीसदी इमारत मालिक नियम की अनदेखी करते हैं। जहां सिस्टम लगे हैं, उनमें से ज्यादातर रखरखाव के अभाव में कबाड़ हो चुके हैं, क्योंकि लोग इसे बोझ समझते हैं। जिम्मेदारों में जागरूकता की कमी इसे और बढ़ावा दे रही है।
- सरकारी इमारतों की हालत भी खराब है, सिस्टम दिखावटी हैं। डीपीसीसी ने जुर्माना बढ़ाने और संयुक्त समिति बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन इसका ठोस क्रियान्वयन रुका हुआ है।
कहां है समस्या?
- नागरिकों की लापरवाही: ज्यादातर घरों (करीब 70 फीसदी) में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है या रखरखाव के अभाव में वे बेकार हैं।
- सरकारी निगरानी का अभाव: अधिकांश सरकारी भवनों में भी वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ केवल दिखावे के लिए हैं,
- नागरिकों द्वारा नियमों की अनदेखी और सरकारी निगरानी का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं।
- सरकारी प्रयासों, अनिवार्य आरडब्ल्यूएच नियमों और प्रोत्साहनों के बावजूद, नागरिकों की उदासीनता और रखरखाव की कमी इसे प्रभावी नहीं होने दे रही है।
समाधान
जागरूकता, सख्त निगरानी और बेहतर डिजाइन से इस स्थिति को सुधारा जा सकता है।
