नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर इस साल दिल्ली में न मुहर्रम पर जुलूस निकलेगा, न ही गणेश चतुर्थी पर पंडाल लगेंगे। केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए दिल्ली सरकार के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने इस बाबत सख्त आदेश दे दिए हैं। आदेश के तहत मुहर्रम पर जुलूस व ताजिया निकालने पर पाबंदी लगा दी गई है। गणेश चतुर्थी पर सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिमा विसर्जन, बड़ी संख्या में एकत्र होने और सामुदायिक स्तर पर पर्व मनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा भगवान गणेश की सार्वजनिक मूर्ति स्थापना या पंडाल बनाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। गणेश चतुर्थी पर्व 22 अगस्त को मनाया जाएगा, जबकि मुहर्रम 30 अगस्त को है। डीडीएमए ने दिल्ली वासियों से पर्व अपने घर पर ही मनाने की अपील की है। डीडीएमए ने सभी संबंधित विभागों को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराने का निर्देश दिया है।

डीडीएमए की ओर से इन त्योहारों के दौरान आयोजित होने वाले समारोहों और कार्यक्रमों के मद्देनजर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला मजिस्ट्रेटों को भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। डीडीएमए ने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जुलाई को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत दिल्ली सरकार की तरफ से भी बड़े धार्मिक समारोहों और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भीड़ को रोकने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन निर्देशों का उल्लंघन होता देखा जा रहा है। लिहाजा, केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देशों का संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है। आगामी त्योहारों के मद्देनजर विस्तार से दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिनका आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा-22 के तहत सभी विभागों द्वारा अनुपालन कराया जाना अनिवार्य है।

आदेश का उल्लंघन करने पर 50 हजार का जुर्माना

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के अनुसार, यमुना या किसी अन्य जलाशय, सार्वजनिक स्थल, तालाब या घाट पर प्रतिमा विसर्जन की अनुमति नहीं दी जाएगी। आदेश का उल्लंघन करने पर पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। डीपीसीसी ने लोगों से कहा है कि वे घर पर ही बाल्टी या किसी अन्य पात्र में विसर्जन की रीति पूरी करें। डीपीसीसी ने नगर निगमों और जिला मजिस्ट्रेटों को भी निर्देश दिया है कि डीडीएमए की ओर से जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। डीपीसीसी ने मूर्ति बनाने और बेचने वालों से भी प्राकृतिक वस्तुओं से भगवान गणेश की मूर्ति बनाने को कहा है।

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