नई दिल्ली [गौरव बाजपेई]। लापता बच्चों को परिजनों से मिलाने का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस की ही एक अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एसीपी) के घर पर 12 वर्षीय बच्चे से काम कराने का मामला सामने आया है। दक्षिणी जिले की चाइल्ड लाइन ने बच्चे को बचाया है। उसके शरीर पर चोट के निशान भी हैं। इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सदस्या प्रज्ञा परांडे ने दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना को नोटिस भेजकर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। अभी तक मामले में प्राथमिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

एनसीपीसीआर द्वारा पुलिस आयुक्त को भेजे गए नोटिस के अनुसार, राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला 12 वर्षीय बच्चा दिल्ली पुलिस में कार्यरत शिप्रा गिरि के वसंत कुंज सी-9 सोसायटी स्थित घर पर रह रहा था। बच्चे को घरेलू काम के लिए यहां लाया गया था। उसकी पिटाई भी की जा रही थी। पिछले सप्ताह बच्चा घर से बाहर निकल गया और किसी गुमटी के पास बैठा रो रहा था।

तभी किसी ने चाइल्ड लाइन को सूचना दी। टीम ने बच्चे को लाकर पुलिस को सौंपा। दक्षिण-पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने बताया कि बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, बच्चा अब भी चाइल्ड लाइन द्वारा निर्धारित शेल्टर होम में रह रहा है। वहीं, एसीपी प्रीत विहार शिप्रा गिरि ने कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। एनसीपीसीआर के नोटिस के बारे में जानकारी होने से उन्होंने इन्कार किया है।

क्या कहता है कानून

दिल्ली हाइकोर्ट के वकील पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चे को लाने वाले, उसे भेजने वाले और उसे अपने साथ रखने वाले पर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 370 और पाक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। आइपीसी 370 के अनुसार बहला फुसलाकर, लालच देकर या दास बनाने की मंशा से किसी को रखने पर उसे मानव तस्करी माना जाएगा। इसमें सात वर्ष की जेल हो सकती है।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari