नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। अदालत के आदेश के बावजूद भी भारतीय ओलिंपिक संघ (आइओए) के अध्यक्ष के तौर पर कार्य कर रहे नरिंदर ध्रुव बत्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की अवकाशकालीन पीठ ने आइओए अध्यक्ष के तौर पर कार्य करने से बत्रा पर रोक लगाते हुए अहम टिप्पणी की कि खेल महासंघ का कामकाज किसी भी तरह के संदेह से ऊपर होना चाहिए।

ऐसे संघों के कामकाज में शुद्धता पदों पर रहने वाले व्यक्ति की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। पीठ ने आइओए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल खन्ना को संघ के अध्यक्ष पद के कर्तव्यों का निर्वहन करने का आदेश दिया।

पूर्व हाकी स्टार व ओलिंपियन असलम शेर खान की अवमानना याचिका पर पीठ ने साथ ही बत्रा और आइओए को नोटिस जारी कर पूछा है कि अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। असलम शेर ने वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर के माध्यम से अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि बत्रा के साथ-साथ आइओए हाई कोर्ट के 25 मई 2022 के आदेश की अवहेलना ​​कर रहा है।

कोर्ट ने 25 मई को बत्रा को आजीवन सदस्य के तौर पर हाकी इंडिया के पद से हटा दिया था और हाकी इंडिया में पद के आधार पर ही उन्हें आइओए अध्यक्ष चुना गया था। अदालत के आदेश के बावजूद भी अध्यक्ष के तौर पर की जाने वाली प्रक्रियाओं में हिस्सा लेकर अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है।

वहीं, आइओए की तरफ से पेश हुई अधिवक्ता रुचिर मिश्रा ने पीठ को बताया कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को तीन जून 2022 को सूचित किया गया कि बत्रा को 25 मई से पद से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि आइओए के संविधान के अनुसार आइओए के अध्यक्ष पद के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल खन्ना ने संभाल रहे हैं।

इस पर पीठ ने बत्रा के अध्यक्ष के तौर पर काम करने पर रोक लगा दी। मामले में अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।

अदालत ने यह दिया था निर्णय

हाई कोर्ट ने एक याचिका पर 25 मई को आदेश पारित करते हुए हाकी इंडिया में खेल संहिता का उल्लंघन कर सृजित किए गए आजीवन अध्यक्ष व सदस्य के पदों को रद कर दिया था।साथ ही राष्ट्रीय खेल संहिता का उल्लंघन करने वाले राष्ट्रीय खेल संघों की मान्यता रद कर दी थी।

साथ ही हाकी इंडिया के प्रतिदिन के मामलों को देखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनिल आर देव, पूर्व निर्वाचन आयोग अध्यक्ष एसवाइ कुरैशी और खिलाड़ी जफर इकबाल की तीन सदस्यों की कमेटी आफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (सीओए) गठित की थी।

अदालत ने कहा था कि हाकी इंडिया के किसी भी आजीवन अध्यक्ष व सदस्य ने अगर उक्त पद के आधार पर राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई पद ग्रहण किया है तो वह ऐसे कार्यालय या पद का आनंद लेना आगे जारी नहीं रखेगा।

Edited By: Geetarjun Gautam