नई दिल्ली, जागरण संवाददाता।  वहीं पुलिस की ओर से लापता लोगोंं की जानकारी के लिए हेल्‍पलाइन नंबर भी जारी किया गया। वहीं, इससे पहले अपनों की तलाश में इमारत के आसपास पहुंचे स्वजन काफी बेचैन नजर आए।  

रस्सी पकड़ कर नीचे कूदी पूजा

फोन करते-करते थक गए हैं। अब यही उम्मीद है कि कहीं से उसकी सलामती की जानकारी हमें मिल जाए। मधुमिता ने बताया कि मेरे पति संजय भी यहां काम करते हैं। आग लगने के बाद उनसे बात नहीं हो पा रही है। यहां पर अग्निशमन कर्मी व पुलिसकर्मी भी कुछ बताने की हालत में नहीं हैं। मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। सब का रो-रोकर बुरा हाल है। इमारत में आग लगने के दौरान नांगलोई के डी ब्लाक की पूजा दूसरी मंजिल पर थी। वह दूसरी मंजिल की खिड़की पर बंधी रस्सी पकड़कर नीचे कूद गई थी। इस दौरान उनकी भांजी दृष्टि ऊपर ही थी, लेकिन वह नहीं कूद पाई। पूजा ने बताया कि चोट लगने के बाद भी उन्होंने दृष्टि के लिए करीब डेढ़ घंटा इंतजार किया। लेकिन, जब दृष्टि नहीं कूदी तो वह नांगलोई गई व स्वजन को उसकी तलाश के लिए भेजा। संजय गांधी अस्पताल के बाहर दृष्टि की मां सुमिता, मामा तिलकराज दृष्टि का रातभर इंतजार करते रहे।

खिड़की से कूदकर बचाई जान

इसी तरह नितिन भी वहीं काम करते थे। उन्होंने भी खिड़की से कूदकर जान बचाई। हालांकि, इस दौरान उनके फेफड़े में धुआं भर गया था। इलाज के बाद उन्हें संजय गांधी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वह स्वजन के साथ घर कृष्ण विहार चले गए। आग लगने की घटना होने के बाद संजय गांधी अस्पताल के बाहर काफी संख्या में लोग पहुंच गए। सभी अपने स्वजन की तलाश में इधर-उधर भटक रहे थे।

Edited By: Prateek Kumar