नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने देशवासियों को दशहरा की बधाई देते आधुनिक रावण के 10 चेहरे - अशिक्षा, अज्ञानता, अक्षमता, अभाव, अहंकार, अभद्रता, अराजकता, असामाजिकता, अत्याचार और अन्याय रूपी असुरों की आहुति देने का आग्रह किया है। इसके साथ देश में समान नागरिक संहिता व जनसंख्या नियंत्रण कानून के साथ ही अन्य की कामना की है। इस संबंध में मंच के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शाहिद सईद ने कहा कि जिस तरह तीन तलाक, धारा 370, 35ए व पीएफआइ रूपी रावण का केंद्र सरकार ने वध किया है वैसे ही अब इस दिशा में कदम बढ़ाया जाए और सामाजिक कुरीतियों और कानूनी कमियों व खामियों में संशोधन कर विजय प्राप्त की जाए। उन्हाेंने सर तन से जुदा जैसे हिंसक शब्दों मजहबी कट्टरता व आतंकवादियों के बम विस्फोट पर त्वरित कार्रवाई कर भाईचारा बढ़ाने पर भी जोर दिया है। साथ ही लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष करने की मांग की।

भाईचारा बढ़ने से होगा देश का विकास

मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल और शाहिद अख्तर ने देशवासियों से आह्वान किया कि सभी धर्मों, समुदायों, वर्ग विशेष से मिलजुल कर दशहरे को हर्षोउल्लास से मनाएं और देश की एकता, अखंडता, भाईचारे और समृद्धि को बनाए रखें। मंच कि ओर से कहा गया कि यदि हम एक दूसरे की भावनाओं, विचारों, त्योहारों और धर्मों का आदर करेंगे तो मजहबी कट्टरता दूर होगी जिससे भाईचारा बढ़ेगा और देश का चौमुखी विकास होगा।

समान नागरिकता संहिता बनाने का नहीं हुआ प्रयास

मंच के राष्ट्रीय संयोजक रजा हुसैन रिजवी और इस्लाम अब्बास ने कहा कि कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी समान आचार संहिता को लेकर बयान दिया था जिसमें कहा गया था कि गोवा बेहतरीन उदाहरण है वहां पुर्तगाल सिविल कोड 1867 लागू है जिसके तहत उत्तराधिकार और विरासत का नियम लागू है। उम्मीद की गई थी कि बाकि राज्य इसे लागू करने का प्रयास करेंगे लेकिन अभी तक प्रयास नहीं हुआ। हिंदू ला 1956 में बनाया गया लेकिन समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास नहीं हुआ।

लागू में लाना जरूरी

भारत फर्स्ट के राष्ट्रीय संयोजक शिराज कुरैशी और इमरान चौधरी ने कहा कि मंच का मानना है कि जैसे- जैसे समय बीत रहा है समान आचार संहिता की जरूरतें सामने आ रही हैं और इसे लागू किया जाना जरूरी है।

Edited By: Prateek Kumar

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