नई दिल्ली। सियासी सरगर्मियों के बीच मौसम का पारा और मानसून का दावा भी इन दिनों चर्चा का विषय है। मौसम में जहां लगातार उतार-चढ़ाव की स्थिति बन रही है वहीं मानसून के आने में देरी एवं उसके सामान्य या उससे कम-ज्यादा रहने के आकलन पर भी विरोधाभास सामने आ रहा है। स्काईमेटर वैदर का अनुमान मौसम विभाग के पूर्वानुमान से थोड़ा अलग है। दिल्ली-एनसीआर में आखिर कैसा रहेगा मानसून, कृषि जगत को फायदा होगा या नुकसान, अलनीनो का क्या रहेगा प्रभाव इन तमाम सवालों पर संजीव गुप्ता ने मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. केजे रमेश से लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के मुख्य अंशः

अभी गर्मी की क्या स्थिति रहने वाली है, खासकर दिल्ली-एनसीआर में?
अभी एक सप्ताह और दिल्ली-एनसीआर में तेज गर्मी से राहत रहेगी। पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव से 24 मई तक बारिश की संभावना भी बनी रहेगी। इस कारण तापमान भी नियंत्रण में ही रहेगा। लेकिन गर्मी अभी खत्म नहीं हुई है। बारिश का दौर खत्म होने के बाद गर्मी दोबारा जोर पकड़ेगी। जून माह में तापमान फिर से 45 डिग्री सेल्सियस पार हो सकता है।

दिल्ली-एनसीआर में कब तक पहुंचेगा मानसून?
अंडमान-निकोबार में मानसून पहुंच चुका है। केरल में छह जून को पहुंचने के आसार हैं। केरल से इसके दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचने में करीब 25 से 26 दिन लगते हैं। इस हिसाब से जुलाई के पहले हफ्ते तक मानसून दिल्ली आ जाएगा। हालांकि स्थानीय कारकों के प्रभाव से बहुत बार यह जल्दी भी आ जाता है।

कैसा रहने वाला है इस बार मानसून?
मानसून सामान्य के आसपास ही रहेगा। 96 फीसद तक बारिश हो सकती है। हालांकि इसमें पांच फीसद तक की कमी या वृद्धि होने की संभावना हमेशा बनी रहती है। बाकी जून के प्रथम सप्ताह में मानसून का एक और पूर्वानुमान जारी किया जाएगा। इसमें उत्तर भारत सहित दिल्ली-एनसीआर के बारे में अधिक स्पष्ट आकलन होगा। इस पूर्वानुमान की सटीकता और गहनता के लिए अलनीनो की परिस्थितियों के साथ-साथ प्रशांत एवं हिंद महासागर की सतह के तापमान पर भी निगाह रखी जा रही है। इतना जरूर कहा जा सकता है कि मानसून के शुरुआती माह में भले बहुत ज्यादा बारिश न हो, लेकिन अंतिम दो माह में खूब अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

लेकिन स्काईमेट वेदर तो 93 फीसद बारिश बता रहा है और इसके लिए अलनीनो को जिम्मेदार ठहरा रहा है?
स्काईमेट वेदर के अनुमान से हम इत्तेफाक नहीं रखते। जहां तक अलनीनो का सवाल है तो हमने 15 अप्रैल को जारी किए गए अपने पहले मानसून अपडेट में भी बताया था कि अलनीनो का प्रभाव कम हो रहा है। यह सही भी साबित हो रहा है। वार्मिंग का जो आंकड़ा उस समय 0.9 फीसद था, अब घटकर 0.7 फीसद हो गया है। अलनीनो का घटता प्रभाव सीधे तौर पर मानसून के सामान्य रहने की ओर इशारा कर रहा है।

खेती के लिए कैसा रहने वाला है इस बार का मानसून?
खेती के लिए भी यह मानसून बढ़िया रहेगा। देश की खेती का 50 फीसद हिस्सा जो असिंचित है और बरसाती पानी पर निर्भर है, देश की अर्थव्यवस्था में 15 फीसद की हिस्सेदारी रखता है। हालांकि मानसून की बारिश का अगला और गहन अपडेट जून के प्रथम सप्ताह में ही जारी होगा, लेकिन हम मान रहे हैं कि खेती भी इस साल मानसून में खूब लहलहाएगी।

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Posted By: Mangal Yadav