नई दिल्ली [जेएनएन]। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने पूरे देश में गोहत्या पर प्रतिबंध की मांग की है। उन्होंने कहा कि संघ की इच्छा है कि देश में गोहत्या रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी कानून बने।

इसके साथ ही उन्होंने गोरक्षा के नाम पर हिंसा की आलोचना करते हुए कहा कि इससे गोरक्षा का अभियान बदनाम होता है। वह महावीर जयंती के अवसर पर तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस समारोह का आयोजन भगवान महावीर जयंती महोत्सव महासमिति, ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कांफ्रेस व दिल्ली जैन समाज द्वारा किया गया था।

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संघ प्रमुख ने कहा कि वैसे, कानून बनाने की दिशा में काम हो रहा है। कई राज्यों में जहां संघ की पृष्ठभूमि वाले लोग सत्ता में हैं वहां ऐसे कानून बनाए गए हैं। साथ ही तमाम जटिलताओं के बीच रास्ता निकालकर पूरे देश में इसे लागू करने को लेकर लोग प्रयास कर रहे हैं।

भागवत ने कहा कि गायों की रक्षा करते हुए ऐसा कुछ नहीं करना है जो दूसरों के विश्वास को ठेस पहुंचाए। कुछ भी हिंसक नहीं करना है।

गायों को बचाने का काम कानून और संविधान का पालन करते हुए हो। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं जो आपको हिंसा करने को कहे। किसी भी प्रकार की हिंसा भारतीय सभ्यता-संस्कृति में मान्य नहीं है। अगर सभी नागरिक अहिंसा का पालन शुरू कर दें तो पूरे भारतवर्ष में किसी भी प्रकार की हिंसा की घटना नहीं होगी।

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संघ प्रमुख ने कहा कि सभी लोगों के भीतर गायों को बचाने का संदेश उतारा जाए तो यह काम बिना कानून के भी हो सकता है।

यदि समाज का व्यवहार बदलता है तो गोहत्या बद हो जाएगी। भागवत ने कहा कि गोरक्षा का काम इस तरह से किया जाए कि अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ें और इस काम को करने वालों को प्रशंसा मिले।

उन्होने कहा कि जैन धर्म हमें जीवों, प्राणियों और संपूर्ण सृष्टि की रक्षा व उनसे प्यार करना सिखाता है। अहिंसा की सीख देता है। हमे भगवान महावीर के बताए मार्ग को अपनाना होगा तभी जाकर भारत को विश्व में एक मजबूत राष्ट्र बनाने में हम सफल होंगे।

इससे पहले समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जैन धर्म को मानने वाले संख्या में भले ही कम हैं, लेकिन वे समाज और प्रकृति को देने में ज्यादा विश्वास करते हैं।

उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद से पूरा विश्व परेशान है। अगर इसमें कोई शांति का रास्ता दिखाता है तो वह है जैन धर्म। यह धर्म वैज्ञानिकता पर आधारित है।

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि भगवान महावीर ने समाज के सोए पुरुषार्थ को जगाने का काम किया।

उन्होंने यह भाव दिया कि जितना अपने शरीर के लिए जरूरी है उतने का ही अर्जन करें, बाकि का दूसरों के लिए त्याग करें। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि आज पूरे विश्व में विकसित होने, विकास को कायम रखने व सुरक्षित रहने पर चर्चा चल रही है। इसका हल जैन धर्म के मूल में है। 

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Posted By: Amit Mishra

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