नई दिल्ली [गौरव बाजपेई]। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

दिल्ली पुलिस ने लगाया विदेश से चंदा लेने का आरोप, जोड़ी गईं 3 और FIR

पेशी के दौरान दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद जुबैर द्वारा इस मामले में साजिश रचने और सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपित को विदेशों से चंदा भी मिला है। यही वजह है कि विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम, 2010 में धारा 35 को एफआईआर में जोड़ा गया है।

जागरण संवाददाता के मुताबिक, शनिवार सुबह से ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को द्वारका में दिल्ली पुलिस एसपीएल सेल की आईएफएसओ इकाई से बाहर लाया गया। इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। 

मोहम्मद जुबैर पर वर्ष 2018 में विवादित ट्वीट कर हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज किया था और 27 जून को गिरफ्तार कर जुबैर को एक दिन के रिमांड पर लिया था। फिर से 28 जून को अदालत में पेश कर चार दिन का रिमांड लिया था। मोहम्मद जुबैर ने इस रिमांड के आदेश की वैधता को चुनौती दी है।

मोहम्मद जुबैर की चुनौती याचिका पर हाई कोर्ट ने पूछा पुलिस का रुख

वहीं, दिल्ली पुलिस रिमांड की वैधता को चुनौती देने वाली आल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने पुलिस को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। पीठ ने कहा कि कहा कि रिमांड दो जुलाई को खत्म हो जाएगा, ऐसे में अदालत दूसरे पक्ष को सुनेगी। हालांकि, पीठ ने कहा कि निचली अदालत के समक्ष कार्यवाही वर्तमान कार्यवाही से प्रभावित हुए बिना जारी रहेगी।

अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने जुबैर के लैपटाप और मोबाइल को सीज करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस फोन से ट्वीट किया गया था वह गुम हो गया है। ऐसे में नए फोन और लैपटाप को जब्त करने का क्या मतलब है? इस पर पीठ ने कहा कि दो जुलाई को रिमांड समाप्त हो रहा है, ऐसे में इसे निचली अदालत तय कर देगी। वृंदा ग्रोवर ने इस पर अनुरोध किया कि कृपया नोटिस जारी करें और सभी जब्ती इस याचिका के परिणाम के अधीन होगी।

इस पर दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने पूछा कि लैपटाप की जब्ती को लेकर चिंता क्यों है? ग्रोवर ने जवाब दिया कि यह निजता का अधिकार है। एसजी ने कहा कि पुलिस पक्षपातपूर्ण तरीके से काम नहीं कर रही है। जांच अधिकारी जांच करेंगे।

मौजूदा मामला सिर्फ एक ट्वीट का नहीं है। इस पर पीठ ने पूछा कि क्या आप और रिमांड मांगेंगे? इसके जवाब में एसजी ने कहा कि नहीं पता कि रिमांड समाप्त होने तक जांच की स्थिति क्या होगी। इस संबंध में कोई बयान देना अभिमानी होगा। इस पर पीठ ने कहा कि मामले में नोटिस जारी किया जा सकता है और पुलिस इस पर पुलिस जवाब दाखिल करे।

Edited By: Jp Yadav