नई दिल्ली [निहाल सिंह]। राजधानी दिल्ली के तीनों नगर निगम में महापौर-उप महापौर के लिए 26 से 28 अप्रैल तक होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा में मंथन शुरू हो गया है। मंथन की इस कड़ी में पार्टी संगठन से राय लेकर महापौर और उप महापौर पद का प्रत्याशी तय करने का फैसला किया है। इसके लिए सांसदों से लेकर नेता प्रतिपक्ष और पार्षदों से राय ली जा रही है। इस राय में जिसके ऊपर आम सहमति होगी संभवत: उसे ही महापौर व उप महापौर पद का प्रत्याशी बनाया जाएगा। निगमों में बहुमत होने के चलते प्रत्याशियों का निर्विरोध जीतना भी तय है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि भाजपा ही एकमात्र संगठन है जिसमें कार्यकर्ताओं से लेकर सभी लोगों को अपनी राय का मौका दिया जाता है। इसी के तहत महापौर व उप महापौर पद के लिए तीनों नगर निगम में रायशुमारी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार शाम तक यह रायशुमारी पूरी कर ली जाएगी। इसमें दिल्ली के सातों सांसदों से लेकर, नेता प्रतिपक्ष, जिला अध्यक्षों और पार्षदों से तीन-तीन नाम मांगे गए हैं। प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारी पार्षदों से संपर्क कर उनकी राय ले रहे हैं। पार्षदों से जो नाम ला रहे हैं उसमें प्रत्येक भाजपा पार्षद को अपना नाम छोड़कर तीन-तीन नाम देने हैं।

उन्होंने बताया कि जिन नामों पर रायशुमारी में आम सहमति होगी उस पर प्रदेश संगठन आखिरी फैसला लेगा। इस रायशुमारी में महापौर-उप महापौर समेत स्थायी समिति के अध्यक्ष के नाम पर चर्चा की जाएगी। परंपरा के अनुसार नामांकन के आखिरी दिन ही महापौर-उप महापौर के साथ स्थायी समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के प्रत्याशियों की भी घोषणा कर दी जाएगी। हालांकि स्थायी समिति के चुनाव की प्रक्रिया जून में पूरी की जाती है।

उल्लेखनीय है कि उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी निगम ने महापौर-उप महापौर पद के लिए चुनाव अधिसूचना पहले ही जारी कर दी है। अधिसूचना के तहत 19 अप्रैल नामांकन का आखिरी दिन है। वहीं, उत्तरी में 26 को तो दक्षिणी में 27 और पूर्वी में 28 अप्रैल को चुनाव होगा। दिल्ली में सात लोकसभा क्षेत्र हैं। सातों पर भाजपा का कब्जा है। ऐसे में महापौर और उप महापौर बनाने में सांसदों की भूमिका अहम हो गई है।

चुनावी वर्ष में कद्दावर नेता को मिल सकता है मौका

वर्ष 2022 में निगम के आम चुनाव होने हैं। वर्ष 2017 में हुए निगम के आम चुनाव के बाद यह पांचवा वर्ष शुरू होगा। निगमों में हर साल महापौर-उप महापौर का चुनाव होता है। ऐसे में यह पांचवे वर्ष के महापौर व उप महापौर चुने जाएंगे। चूंकि यह चुनावी वर्ष हैं इसलिए भाजपा इस बार कद्दावर पार्षदों पर दांव लगाएगी। भाजपा को ऐसे चेहरे की तलाश हैं जो चुनावी वर्ष सभी मुद्दों को संभाल सके। ऐसे में निगमों कार्यकुशलता के आधार पर वर्तमान में महापौर व उप महापौर एक बार फिर मौका दे सकती है। वहीं, पूर्व महापौर व जोन चेयरमैन पर भी दांव लगा सकती है।