गढ़मुक्तेश्वर [प्रिंस शर्मा]। देश की रक्षा के लिए सिंभावली के सपूत कुलदीप पूनिया ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। दिसंबर 2014 में वह छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए थे। शहादत से पहले उन्होंने अपने तीन साथियों की जान बचाई थी। वह सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन में थे और साथियों के बीच चीता के नाम से जाने जाते थे। जब भी गांव आते तो युवाओं को भारत माता की सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे। कुलदीप चौपाल में सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर भी चर्चा करते थे। माता-पिता को अपने इस बहादुर बेटे पर नाज है।

नक्सलियों ने अचानक कर दी फायरिंग 

गांव जमालपुर निवासी किसान धर्मपाल के 26 वर्षीय पुत्र कुलदीप सीआरपीएफ में भर्ती हुए। दिसंबर 2014 में डिप्टी कमांडेंट डीएस वर्मा, असिस्टेंट कमांडेंट राजेश कपूरिया और कोबरा बटालियन के जवानों के साथ कुलदीप सुकमा की चिंतागुफा के घने जंगलों में गए थे। लौटते समय जब टीम एलमागुड़ा की पहाड़ी के निकट पहुंची तो नक्सलियों ने अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में कुलदीप, डीएस वर्मा, राजेश कपूरिया समेत 14 जांबाज शहीद हो गए। कुलदीप को दस गोलियां लगी थीं, इसके बावजूद उन्होंने अपने तीन साथियों को मौत के मुंह से निकाल लिया। घटना से कुछ घंटे पहले ही कुलदीप ने मां प्रेमवती से फोन पर बात की थी।

शादी की तैयारियों में लगे थे परिजन

पिता धर्मपाल ने बताया कि गाजियाबाद के अटौला के एक परिवार की युवती से कुलदीप का विवाह तय हुआ था। गोद भराई की रस्म पूरी करने के बाद वह ड्यूटी पर चले गए थे। 15 दिसंबर के बाद उनकी बारात जानी थी। परिजन शादी की तैयारियों में लगे थे, तभी उन्हें बेटे की शहादत की खबर मिली। लगभग दो वर्ष बाद कुलदीप की माता ने एक और पुत्र को जन्म दिया और उसका नाम भी कुलदीप रखा। 

Posted By: Amit Mishra