नई दिल्ली [शुजाउद्दीन]। आपातकाल का नाम आते ही 25 जून, 1975 की रात का काला मंजर लोगों की आंखों के सामने आ जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ आवाज उठाने की हिमाकत करने वालों को जेल की कोठरियों में बंद कर दिया गया था। शारीरिक और मानसिक यातनाएं इस तरह दी गईं कि उसे याद कर लोग आज भी सिहर जाते हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के घोंडा में रहने वाले लाल बिहारी तिवारी (78) को पुलिस ने रातों रात घर से उठाकर जेल में बंद कर दिया। इस बीच घर की आर्थिक स्थिति इस कदर खराब हो गई कि उनकी पत्नी को परिवार चलाने के लिए सब्जियां तक बेचनी पड़ी।

आपातकाल के बाद तिवारी आगे चलकर विधायक और सांसद भी बने। उन्होंने बताया कि वह जनसंघ के कार्यकर्ता थे। जून 1975 में दिल्ली के रामलीला मैदान में जय प्रकाश नारायण की एक सभा हुई। इसमें जनसंघ, ओल्ड कांग्रेस सहित विभिन्न दल शामिल हुए। सभी ने एक आवाज में इंदिरा गांधी को कुर्सी से हटाने का आह्वान किया। अदालत ने इंदिरा गांधी के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। 25 जून की रात 12 बजे देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया। जनसंघ समेत अन्य गैर कांग्रेसी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को घर, ऑफिस समेत अन्य जगहों से पुलिस गिरफ्तार कर जेल में बंद करने लगी। चूंकि तिवारी खुद जनसंघ के कार्यकर्ता थे, ऐसे में आपातकाल लगते ही वह अलग-अलग इलाकों में रहकर इंदिरा के खिलाफ अभियान चलाते रहे।

जुलाई 1975 में उन्हें किसी ने सूचना दी कि उनके बेटे रवि तिवारी की तबीयत बहुत खराब है। वह रात के समय छिपते हुए घर पर बेटे को देखने पहुंचे। उसी दिन पुलिस ने छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनकी कमाई से घर खर्च चलता था। उनके परिवार में पत्नी विंदेश्वरी देवी के अलावा छह बच्चे थे। परिवार के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया।

दोस्त और रिश्तेदारों ने छोड़ दिया था साथ
लाल बिहारी तिवारी ने बताया कि पुलिस उन्हें डीआइआर के तहत गिरफ्तार कर शाहदरा थाने लेकर गई। यहां दो दिनों तक उन्हें लॉकअप में रखकर बहुत मारा गया। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल में बंद कर दिया। वह जेल में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, चौधरी चरण सिंह समेत बड़े नेताओं के साथ भी रहे। जेल में बहुत यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने इंदिरा का विरोध करना नहीं छोड़ा। 19 महीने में जेल से रिहा हुए। वह जब जेल गए तो रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने परिवार का साथ पूरी तरह से छोड़ दिया।

आपातकाल के बाद चमकी किस्मत
आपातकाल के बाद तिवारी की किस्मत खूब चमकी। पहली बार वह जून 1993 में घोंडा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से चुनाव लड़े और जीत गए। कुछ ही महीनों के बाद उन्हें खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री बनाया गया। वह तीन बार सांसद भी रहे। उन्होंने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ ही एचकेएल भगत को भी हराया। मौजूदा समय में वह दिल्ली प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी के सदस्य हैं।

जेल में लगाई संघ की शाखा
तिवारी ने बताया कि तिहाड़ जेल के वार्ड नंबर 13 में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवी बंद किए गए थे। कई सप्ताह तक पुलिस ने तरह-तरह की यातनाएं दीं, लेकिन लोगों का हौसला नहीं टूटा। जेल में बंद होने के करीब तीन महीने के बाद उन्होंने इसी वार्ड में संघ की शाखा लगानी शुरू कर दी।

जेल जाते ही चली गई थी नौकरी
तिवारी दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक भंडार में लीगल मैनेजर थे। जैसे ही विभाग को उनकी गिरफ्तारी की खबर लगी उन्हें तुरंत नौकरी से निकाल दिया गया। जेल में कोई काम नहीं कराया जाता था। आपातकाल खत्म होने के बाद देश में नई सरकार बनी और उन्हें फिर से बहाल कर दिया गया।

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Posted By: JP Yadav