नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। देश भर में गणतंत्र दिवस धूमधाम से बनाया जाता है। इस दौरान पूरे जोश के साथ राजपथ पर झांकियां निकाली जाती है। गणतंत्र दिवस चार दिवसीय कार्यक्रम के रूप में आन-बान और शान से देश की राजधानी दिल्ली में मनाया जाता है। इस चार दिवसीय कार्यक्रम का समापन 29 जनवरी को होता है। जिसे बीटिंग रिट्रीट कहा जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस खास प्रोग्राम के बारे में जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। 

क्यों कहा जाता है बीटिंग रिट्रीट

गणतंत्र दिवस के समापन समारोह काे मुख्यत: बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी कहा जाता है। यह शब्द मुख्य रूप से सेना के लिए ही इस्तेमाल होता है। यह सेना का अपने बैरक में लौटने का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है जब सेनाएं युद्ध समाप्त करके लौटती थी और युद्ध के मैदान से वापस आने के बाद अपने अस्त्र-शस्त्र उतार कर रखती थीं। आम तौर पर सूर्यास्त के समय ही सेना अपने शिविर में लौट आती थीं। इस दौरान झण्डे नीचे उतार दिए जाते थे। इसे ही बीटिंग रिट्रीट कहते हैं। यह समारोह बीते समय की एक झलक होती है। 

बहुत ही खूबसूरत अंदाज में होता है इस प्रोग्राम का आगाज 

आपको बता दें कि बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी आज की नई परंपरा नहीं है। यह गणतंत्र दिवस पर हर साल आयोजित की जाती है। यह परंपरा अंग्रेजों के समय से आयोजित होती आ रही है। बीटिंग द रिट्रीट दिल्ली के विजय चौक पर आयोजित की जाती है। इस मौके पर राष्ट्रपति भवन को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। ये देखने में काफी खूबसूरत होता है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। 

कैसे होता है इसका आयोजन

राजधानी दिल्ली के विजय चौक पर हर साल 29 जनवरी को इसे सेना धूमधाम से मनाती है। इस समारोह से पहले नार्थ ब्लॉक साउथ ब्लॉक सहित राष्ट्रपति भवन को बहुत ही खूबसूरत तरीके से लाइटों से सजाया जाता है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के राष्ट्रपति होते हैं। इस बार राष्ट्रपति के तौर इस कार्यक्रम में राम नाथ कोविंद इस समारोह में मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में अपने अंग रक्षकों के साथ समारोह स्थल पर पहुंचते हैं। जब राष्ट्रपति इसमें शिरकत करते हैं तो उनके अंगरक्षक राष्ट्रीय सलामी देने के लिए एकत्र होते हैं, जिसके बाद भारतीय राष्ट्रगान, जन गण मन बजाया जाता है और इसके बाद सामूहिक बैंड वादन सहित भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। सेना के बैंड अपने प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लेते हैं। भारत माता की जय और तालियों की गर्जना के साथ ही यह शाम इतिहास में अमर हो जाती है।

कब हुई थी शुरुआत

'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह 1950 की शुरूआत में आरंभ किया गया था जब भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट्स ने सामूहिक बैंड के प्रदर्शन का एक अनोखा समारोह स्वदेशी रूप से आरंभ किया। सबसे बड़ा समारोह नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है जहां ध्वजारोहण के बाद परेड की जाती है और जिसमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया जाता है।

Edited By: Prateek Kumar