नई दिल्ली [सोनू राणा]। दस महीने से ज्यादा समय से कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने दिल्लीवासियों की परेशानी बढ़ा रखी है। सिंघु बार्डर टीकरी बार्डर बंद होने की वजह से गांवों के रास्तों से अब वाहनों का आवागमन हो रहा है। पंजाब खोड़, कुतुबगढ़, मुंगेशपुर, औचंदी बार्डर, हरेवली, घोगा, सफियाबाद, बांकनेर समेत राजधानी दिल्ली को हरियाणा से जोड़ने वाले सभी रास्ते जर्जर हो गए हैं। रोज हजारों वाहनों का यहां से आवागमन होता है, फिर भी वर्षों से इन सड़कों का निर्माण नहीं किया गया है। अब इन रास्तों की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई है। लोगों को गड्ढों और उबड़ खाबड़ रास्तों से होते हुए ही अपना सफर तय करना पड़ रहा है।

पंजाब खोड़-खैरपुर रोड के गड्ढों ने बढ़ाई मुसीबत

पंजाब खोड़ गांव से हरियाणा के खैरपुर को जाने वाले रास्ते पर गड्ढे हैं। हरियाणा से दिल्ली का सफर लोगों के लिए बड़ी मुसीबत है। इस रास्ते से हर रोज गुजरने वाले लोगों के लिए यहां सार्वजनिक वाहन भी नहीं चलते हैं, जिसमें बैठकर वह आ सकें। वह दोपहिया वाहन या फिर अन्य किसी साधन में बैठकर पंजाब खोड़ आते हैं। यहां पर स्कूल के पास तो सड़क में दो फिट गहरे गड्ढे हैं, जिनमें पानी भरा है। इस रास्ते से निकलना लोगों के लिए बड़ा ही कठिन हो गया है।

कुतुबगढ़-लड़रावण, सोहटी रोड और गढ़ी रोड की हालत दयनीय

कुतुबगढ़ गांव से हरियाणा के तीन गांव लड़रावण, सोहटी और गढ़ी गांव को रास्ता जाता है। विडंबना यह है कि तीनों के तीनों रास्तों की वर्षों से दयनीय हालत है। किसी का पांच, किसी का दस तो किसी का 15 वर्षों से निर्माण नहीं हो पाया है। लड़रावण रोड पर तो रास्ते के बीचोंबीच नाले के मेनहोल के ढक्कन गायब हैं। सोहटी रोड तो समझ ही नहीं आती है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। इसके अलावा गढ़ी गांव जाने वाली सड़क भी जगह-जगह टूटी है।

बदहाली पर आंसू बहा रहा घोगा-कत्लुपुर रोड

घोगा-कत्लूपुर रोड पर रास्ता पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सिंघु बार्डर बंद होने के बाद यहां से भी वाहनों का आवागमन होता है। ये रास्ता अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बारिश के दौरान तो यहां से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार तो वाहन भी फंस जाते हैं, जिसे क्रेन की मदद से निकाला जाता है। यही रास्ता है जो ओलिंपिक पदक विजेता के गांव नाहरा को जाता है।

औचंदी गांव की सड़क को मरम्मत का इंतजार

औचंदी गांव से औचंदी बार्डर के बीच में रास्ता कई जगह से महीनों से टूटा है। इसकी मरम्मत को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की गई हैं, लेकिन टूटी सड़कों की समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया। बीते वर्ष जब प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली को घेरा था तो औचंदी बार्डर से लेकर हरेवली मोड़ तक ट्रकों की लाइन लग गई थी। लोगों को घरों से बाहर निकलने में भी परेशानी हो गई थी।

इस बाबत सौरभ लोहचब (औचंदी गांव) की मानें तो बारिश के दौरान स्कूल के पास बने गड्ढों में तो एक महीने तक जलभराव रहता है। इन गड्ढों में ईंटों से भरे ट्रक फंस जाते हैं।  

वहीं, रविंद्र राणा (कुतुबगढ़) का कहना है किजब सिंघु बार्डर, आचंदी और टीकरी बार्डर बंद हो गए थे तो गांव की सड़कों पर जाम लगा रहता था। सोहटी रोड पर सड़कों के साथ नाले भी टूट गए हैं। 

विकास पंजाबी (पंजाब खोड़) ने बताया कि पंजाब खोड़-खैरपुर सड़क टूटी पड़ी है। यह रोड भारी वाहनों के लिए नहीं बना है। भारी वाहनों के गुजरने के कारण स्कूल के पास भी सड़क टूट गई हैं।

विनित कुमार (नरेला गांव) का कहना है किघोगा-कत्लुपुर रोड पर सिर्फ मिट्टी पड़ी है। सबोली, लामपुर बार्डर और सफियाबाद रोड से गुजरने वाले वाहन चालक भी गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।   

पूनम सहरावत (पार्षद) के मुताबिक, सोहटी रोड का निर्माण कार्य आने वाले दिनों में शुरू हो जाएगा। इसके बाद एक-एक करके अन्य रास्तों को भी बनवाया जाएगा। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। 

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Edited By: Jp Yadav