नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। मोतीनगर में फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से ठगी करने वाले गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। शिकार को इन पर शक न हो, इसके लिए ये कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी देते थे। इन्हें कनाडा की बोलचाल वाली अंग्रेजी का उच्चारण करना सिखाया जाता था। कॉल सेंटर में नौकरी देने से पहले ये साक्षात्कार भी लेते थे। इस दौरान उन्हें बताया जाता था कि वे कनाडा सरकार की जांच एजेंसी के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए जब भी आप वहां के नागरिकों को फोन करेंगे तो अपनी पहचान कनाडा पुलिस के अधिकारी के तौर पर ही देंगे।

हर किसी का वेतन अलग-अलग

कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन मिलता था। किसी को 80 हजार तो किसी को 15 हजार दिया जाता था। जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर में रात के समय ही कॉलिंग का काम होता था। जबकि दिन में वहां रात भर चले काम का डाटा तैयार किया जाता था, इसमें ठगी के पैसे की रकम को जोड़ना भी शामिल है। मामले की जांच कर रहे एसीपी ऑपरेशन उमाशंकर, इंस्पेक्टर अरुण कुमार, एसआइ अमित वर्मा, हेडकांस्टेबल विवेक कुमार की टीम ने आरोपितों से अलग- अलग पूछताछ शुरू की।

तीन माह पहले ही मिली थी नौकरी 

इसमें सामने आया कि ज्यादा लोग करीब तीन माह पहले नौकरी पर रखे गए हैं। फरार आरोपित राजा, पंकज, सुशील, नवीन और दिव्यम अरोड़ा ने तीन माह पहले कॉल सेंटर शुरू किया था। जिस जगह पर कॉल सेंटर चल रहा था, वह पांच महीने पहले किराये पर ली गई थी। इसके लिए एक फर्जी कंपनी भी बनाई। इस कंपनी की आड़ में यह पांचों दोस्त विदेशियों से ठगी करते थे।

फोन नंबर में करते थे हेरफेर

पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने अपना प्रोग्राम तैयार कर लिया था, जिसकी मदद से वह दिल्ली में बैठकर लोगों को फोन करते थे और फोन उठाने वाले के मोबाइल पर कनाडा का फोन नंबर दिखाई देता था। आरोपितों के पास से पुलिस ने 55 कंप्यूटर,35 मोबाइल, 2 इंटरनेट राउटर और अन्य सामान बरामद किए हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपितों ने कई वॉलेट एप चुने हुए थे। जिन्हें वह पीड़ितों से कनाडा सरकार का अधिकारिक वॉलेट एप बताते थे। यह सभी एप गैर कानूनी हैं।

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