नई दिल्ली [प्रो. अमित गोयल]। डिजिटल बैंकिंग की लगातार बढ़ती डिमांड देखकर माना जा रहा है कि वर्ष 2040 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बैंकिंग हब बन जाएगा। इसी को देखते हुए 2022 के आम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के 75 जिलों में 75 डिजिटल बैंकों की स्थापना करने की घोषणा की थी। रिजर्व बैंक भी अपनी डिजिटल करेंसी शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, सरकार देशभर के पोस्ट आफिसों का भी डिजिटलीकरण करने की बात कह चुकी है। जाहिर है ये सभी कदम डिजिटल बैंकिंग में रोजगार के नये द्वार खोलने वाले हैं। इसका फायदा यह होगा कि सरकारी और निजी बैंकों के अलावा तमाम वित्तीय संस्थानों में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। जरूरत है कि सही वक्त पर सही निर्णय लेने की।

डिजिटल बैंकिंग क्या है

डिजिटल बैंकिंग और परंपरागत बैंकिंग में सबसे बड़ा अंतर यह है कि डिजिटल बैंक की कोई फिजिकल ब्रांच नहीं होती है। इसे इंटरनेट के जरिये पूरी तरह से आनलाइन आपरेट किया जाता है। अकाउंट खुलवाना, पैसे निकालना और जमा करना, किसी को पेमेंट करना, किसी से पेमेंट प्राप्त करना, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना सब कुछ आनलाइन होता है। पिछले कुछ सालों से देश के कई बड़े बैंक भी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं दे रहे हैं। डिजिटल बैंकिंग में यूपीआइ, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम आदि शामिल हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आपका डिजिटल बैंक हर वक्त (चौबीसों घंटे) आपके पास रहता है। आप जब चाहें, मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटाप आदि के माध्यम से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंस में अवसर

आरबीआइ की एक रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में डिजिटल लेनदेन में उसका लक्ष्य रोजाना एक अरब ट्रांजेक्शन का है। इसी का नतीजा है कि स्मार्टफ़ोन यूजर्स अब एक क्लिक में ही वित्तीय लेनदेन कर पा रहे हैं। अब लोग बैंक से जुड़े काम के लिए घर से निकलने, आने-जाने में समय और पैसे खर्च करने के बजाय सभी लेनदेन के लिए डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक आंकड़े के अनुसार, शहरी क्षेत्र में आज तीन चौथाई यूजर्स डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे शहरों में भी इस बैंकिंग का उपयोग बढ़ रहा है, जो अगले कुछ वर्षों में और तेजी से बढ़ने वाला है। अच्‍छी बात यह है कि जितनी तेजी से यह क्षेत्र बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसमें रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंस में कुशल और प्रबंधकीय विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं की आज अत्यधिक मांग है।

कोर्स एवं योग्‍यताएं

डिजिटल बैंकिंग की जरूरत और मांग को देखते हुए अब कई तरह के प्रोफेशनल कोर्स आ गए हैं। कोई भी नौजवान डिग्री के अलावा डिप्लोमा स्तर पर डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंस पाठ्यक्रमों का विकल्प चुन सकता है। डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंस में एक साल का पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूरा करके छात्र बैंकिंग के विभिन्‍न पहलुओं से परिचित होंगे और उनके करियर को एक नई दिशा मिलेगी। अगर आप डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंस में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री आवश्यक है। इसके बाद डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंस में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं।

बुनियादी योग्यता को जांचना

स्नातक परीक्षा के अंतिम वर्ष में बैठने वाले छात्र भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इस कोर्स में दाखिले के लिए स्नातक में 50 प्रतिशत अंक आवश्यक है। यह डिप्लोमा पत्राचार माध्यम से भी किया जा सकता है। कोर्स के दौरान आपको डिजिटल बैंकिंग के तौर पर स्कोर बेस्ड लेंडिंग, वर्चुअल मीटिंग्स, ई-केवासी, साइबर फ्राड्स, एआइ, डिजिटल पेमेंट्स, कोलेबोरेट आफिस, एपीआइ, बैंकिग क्रिप्टोकरेंसी जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। डिजिटल बैंकिंग और फाइनेंस में पीजी डिप्लोमा करने के लिए एक योग्यता परीक्षा और एक व्यक्तिगत साक्षात्कार में भी उपस्थित होना पड़ता है। लिखित परीक्षा में अंग्रेजी, संख्यात्मक क्षमता, तर्कशक्ति के सवाल पूछे जाते हैं, जिसका मकसद छात्र की बुनियादी योग्यता जांचना है।

प्रो. अमित गोयल

डायरेक्‍टर, टीकेडब्ल्यूएस इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग एंड फाइनेंस, नयी दिल्ली

https://tkwsibf.edu.in/

प्रमुख संस्थान

  • इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, नयी दिल्ली
  • www.ignou.ac.nic
  • इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नयी दिल्ली
  • www.ipu.ac.in
  • टीकेडब्‍लूएस इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग एंड फाइनेंस, नयी दिल्ली
  • www.tkwsibf.org
  • मणिपाल युनिवर्सिटी, कर्नाटक
  • www.manipal.edu
  • सिंबायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, मुंबई, महाराष्‍ट्र
  • www.siu.edu.in

Edited By: Prateek Kumar

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