नई दिल्ली, जेएनएन। सर्दी में स्वाइन फ्लू की बीमारी अक्सर सामने आती है, क्योंकि इसमें इसके वायरस एच1एन1 सक्रिय हो जाते हैं। वैसे तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस बीमारी को महामारी की श्रेणी से अलग कर चुका है। फिर भी, बच्चों, बुजुर्गो, गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि मेट्रो और अधिक भीड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करें। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है, इसलिए भीड़ वाली जगहों पर संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है।

विशेषज्ञों की ये है राय 

अपोलो अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. राजेश चावला ने बताया कि स्वाइन फ्लू होने पर खांसी, जुकाम, बुखार और दर्द की परेशानी होती है। हर मरीज को जांच की जरूरत नहीं होती और ज्यादातर मरीज तो सिर्फ पैरासिटोमॉल दवा से ठीक हो जाते हैं। इसलिए इस बीमारी के होने पर घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चों और बुजुर्गों  को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से मधुमेह, रक्तचाप या कोई अन्य बीमारी हो तो उन्हें भी अधिक सतर्क रहना चाहिए। ऐसे लोगों को स्वाइन फ्लू होने पर यह उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए टीकाकरण उपलब्ध

 राजेश चावला ने बताया कि स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। बच्चों और बुजुर्गो को टीका लगाना चाहिए। एम्स के जेरियाट्रिक मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. विजय गुर्जर ने कहा कि लोगों को खानपान ठीक रखना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि बीमार होने पर खुद इलाज न करें बल्कि डॉक्टर को दिखाएं।

स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश

स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामले को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय के अतिरिक्त निदेशक स्वाइन फ्लू (एन1एन1) के प्रभारी डॉ. एसके रहेजा ने बताया कि अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों को मास्क का इस्तेमाल करने का भी निर्देश दिया गया है। प्रशासन के पास स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए एक लाख टैबलेट उपलब्ध हैं। अस्पतालों में इलाज का पूरा प्रबंध है।

स्वाइन फ्लू के इतने मामले सामने आए

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडीसी) के अनुसार पिछले साल दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 136 मामलों की पुष्टि हुई थी, जबकि इस साल पहले महीने में ही 168 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। आरएमएल अस्पताल में स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसमें इस माह स्वाइन फ्लू के दो मरीजों की मौत हो चुकी है। दोनों दिल्ली के थे।

सात जनवरी को नेहरू नगर के रहने वाले 21 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। वहीं, 15 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। जांच में उन्हें स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा उन्हें निमोनिया और कई अन्य बीमारियां भी थीं। सफदरजंग अस्पताल में दिसंबर दो लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है। इनमें से एक मरीज गुरुग्राम और दूसरा हिसार के रहने वाले थे।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

अगर किसी को बुखार, खांसी, नाक बहना, छींक आना, बलगम आना, गले में खरांस, शरीर में दर्द, सिर दर्द, सांस लेने में परेशानी है तो वह स्वाइन फ्लू का शिकार हो सकता है। अगर किसी को बलगम में ब्लड आना, सीने में दर्द और बेहोश होने की शिकायत है तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

स्वाइन फ्लू से ऐसे करें बचाव

अगर किसी को स्वाइन फ्लू है तो ऐसे मरीजों को एक कमरे में आइसोलेट करके रखना चाहिए। जब ’खांसी या छींक आए तो चेहरे पर हाथ नहीं रखना चाहिए, बल्कि रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बीमारी से बचने के लिए ’हाथों की नियमित सफाई करना चाहिए। लोग सेनीटाइजर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ’भीड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। किसी से मिलने पर हाथ न मिलाएं, बल्कि हाथ जोड़कर अभिवादन करें। ’बीमार होने पर खुद से इलाज न करें, डॉक्टर को दिखाएं, खूब पानी पीना चाहिए। 

हर बुखार नहीं होता स्वाइन फ्लू

सर्दी जुकाम, दर्द, बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी हो तो जरूरी नहीं कि स्वाइन फ्लू हो। आरएमएल अस्पताल के अनुसार इस महीने अब तक 21 मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण थे। जांच होने पर इनमें से 11 मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई। चार मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई, इनमें से दो की मौत हो गई। दो स्वस्थ होकर वापस घर जा चुके हैं। छह मरीजों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

Posted By: Mangal Yadav