नई दिल्ली [राहुल मानव]। दिल्ली सरकार के गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (जीजीएसआइपीयू) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके दो पूर्व छात्रों ने Needplasma.org नाम से एक वेबसाइट तैयार की है। जिसमें कोरोना संक्रमित व्यक्ति और कोरोना से ठीक हो चुके लोग बतौर प्लाज्मा डोनर अपने मोबाइल नंबर एवं राज्य की जानकारी वेबसाइट पर डालेंगे।

वर्ष 2016 में आइपीयू से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर चुके मयंक कुमार मित्तल और सचिन भारद्वाज ने दो दिन पहले इस वेबसाइट को तैयार किया है। दोनों का कहना है कि इसमें सरकार के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया गया है। इसमें कोरोना संक्रमित व्यक्ति एवं प्लाज्मा डोनर का नाम और पता की जानकारी नहीं मांगी जा रही है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति द्वारा अपना मोबाइल नंबर और राज्य का नाम डाला जाएगा। इसके बाद उन्हें विकल्प दिया गया है कि वह अपने ब्लड ग्रुप की जानकारी डालें या नहीं डालें। प्लाज्मा डोनर खुद कोरोना संक्रमित व्यक्तियों से संपर्क कर सकेंगे।

हमारी ये ही सब कोरोना संक्रमित के मरीजों एवं उनके रिश्तेदारों से निवेदन है कि वह अगर चाहें तो अपना ब्लड ग्रुप डाल सकते हैं। इससे प्लाज्मा डोनर का ब्लड ग्रुप अगर उनसे मेल हो जाएगा तो वह तुरंत कोरोना संक्रमित व्यक्ति से संपर्क कर सकेंगे। इसमें मदद करने के लिए सिर्फ एक ही राज्य से प्लाज्मा डोनर और कोरोना संक्रमित व्यक्ति होने चाहें। कोरोना संक्रमित व्यक्ति खुद प्लाज्मा डोनर से संपर्क नहीं कर सकते हैं क्योंकि प्लाज्मा डोनर के पास फिर बहुत कॉल आने लगेंगे।

ऐसे में प्लाज्मा डोनर का स्वयं अपनी इच्छा अनुसार कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की मदद करने के लिए आगे आने का संकल्प महत्व रखता है। मंयक मित्तल ने कहा कि जल्द से जल्द लोगों में इसे और भी ज्यादा प्रचलित करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी पत्र लिखेंगे। जिससे दिल्ली के लोगों को दिल्ली सरकार की सहायता से इस वेबसाइट के जरिये मदद मिल सके।

क्यों आया वेबसाइट शुरू करने का आइडिया

सचिन ने बताया कि बीते कुछ दिनों से यह बात मेरे और मयंक के सामने आ रही थी कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति ठीक हो रहे हैं लेकिन जो कोरोना संक्रमण से लोग जूझ रहे हैं। उन्हें प्लाज्मा थेरेपी की आवश्यकता है। अब दिल्ली में सरकार की सहायता से यह व्यवस्था अस्पतालों में शुरू हो चुकी है। लेकिन यह भी बात हमारे समक्ष आई है कि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों को प्लाज्मा थेरेपी के लिए डोनर नहीं मिल पा रहे हैं। इसलिए यह वेबसाइट हमने शुरू की है।

दोनों हैं सोफ्टवेयर इंजीनियरिंग

सचिन भारद्वाज दिल्ली के उत्तम नगर में रहते हैं। उनके पिता धर्मेंद कुमार शर्मा दिल्ली सरकार के स्कूल में शिक्षक हैं और माता शारदा देवी में गृहणी हैं। वर्ष 2016 में बीटेक करने के बाद उन्होंने ग्रेटर नोएडा में एक सोफ्टवेयर कंपनी में बतौर सोफ्टवेयर इंजीनियर पद संभाला। उनके 12वीं में 80 फीसद अंक थे और उन्होंने द्वारका मोड़ के पास स्पिंग मेडोज पब्लिक स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की थी।

आइआइटी में दाखिला के लिए सचिन ने सपना देखा था लेकिन जेईई मेंस परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे। वह उत्तर प्रदेश टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लॉ इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-तमिल नाडू और आइपीयू की इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हुए थे। वहीं मंयक कुमार मित्तल रोहिणी सेक्टर-32 में कृष्ण विहार में रहते हैं। उनके पिता राजीव मित्तल केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं। माता अभिलाषा मित्तल गृहणी हैं।

उन्होंने वर्ष 2016 में बीटेक करने के बाद एक साल तक अपना एक स्टार्टअप शुरू संचालित किया था, जो असफल रहा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ष 2017 में गेट की परीक्षा देते हुए दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से आइटी में एमटेक में दाखिला लिया और वर्ष 2019 में एमटेक की पढ़ाई पूरी की।

वह बेंगलुरु की एक कंपनी में सोफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उनके 12वीं में 82.6 फीसद अंक आए थे। 12वीं के बाद ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की परीक्षा दी थी। जिसमें वह असफल रहे थे। लेकिन उनका संघर्ष जारी रहा। मयंक ने डीटीयू में रहकर कई सामाजिक कार्य किए जिसमें उन्होंने वंचित वर्ग के लोगों को कपड़ें बांटने की मुहिम भी शुरू की थी।

Posted By: Mangal Yadav

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