नई दिल्ली [किशन कुमार]। हलक सुखा देने वाली गर्मी और चिलचिलाती धूप। ऐसे में दक्षिणी दिल्ली के सफदरजंग इलाके में सड़क किनारे खड़े इन बुजुर्गवार पर नजरें ठहर जाती हैं। कंपकंपाते हाथों से पानी का गिलास थामे वह आप तक पहुंच जाते हैं। इनके इस जज्बे और सेवाभाव का हर कोई कायल है। इनके इस जज्बे और सेवाभाव का हर कोई कायल है।

बूढ़ी आंखों से कम दिखता है, लेकिन दिल में एक ही चाहत कि चिलचिलाती धूप में यहां से गुजरने वालों की प्यास बुझ जाए। यही कारण है कि 71 साल के महेंद्रपाल सिंह हर दिन अपनी स्कूटी पर तीस लीटर के करीब पानी और गिलासें लेकर घर से निकल पड़ते हैं लोगों की प्यास बुझाने। पिछले आठ साल से यह सिलसिला इसी तरह चल रहा है।

निस्वार्थ भाव से इस काम में जुटे महेंद्रपाल बताते हैं कि पहले जुराबों का कारोबार था, लेकिन जब से रिटायर्ड हुआ, तब से घर में मन नहीं लगा करता था। इस दौरान एक दिन ऐसे ही गर्मी के दिनों में इंडिया गेट पर एक प्रदर्शन के दौरान लोगों को प्यास से बेहाल होते देखा। ऐसे में घर से बड़े बर्तनों में पानी भर और स्कूटी पर रखकर इंडिया गेट पहुंच गया। लोगों की प्यास बुझाई। इसके बाद से मन में निस्वार्थ भाव सेवा करने का जच्बा जागा।

महेंद्र के परिवार में पत्नी, बेटी व बेटा है। बेटी विदेश में रहती है। बेटा मानसिक रूप से कमजोर है। बहरहाल, महेंद्र अपने इस काम के जरिये सुकून तलाशने में जुटे हैं। कहते हैं, जैसे ही दिन के साथ धूप अपने कड़े तेवर दिखाने लगती है वैसे ही घर से पानी लेकर लोगों की प्यास बुझाने को निकल जाता हूं।

दोपहर भर महेंद्र धूप में बिता देते हैं। बसों से लेकर दोपहिया वाहनों को, जो भी पानी के लिए रुके प्रेमपूर्वक पानी पिलाते हैं। इस बीच यदि पानी खत्म हो जाता है तो घर से फिर से पानी लाकर लोगों को पानी पिलाना जारी रहता है। महेंद्र कहते हैं कि इस काम में पत्नी का भी पूरा साथ मिलता है। जब तक सांस है तब तक धूप में खड़े होकर पानी पिलाने का सिलसिला जारी रहेगा। जल्द ही सफदरजंग एयरपोर्ट बस स्टैंड पर पानी के मटके लगाने की योजना है। इससे हर समय यहां पर पानी उपलब्ध रहेगा, बार-बार घर नहीं जाना पड़ेगा।

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Posted By: JP Yadav

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