जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसे में सिंघु, टीकरी व गाजीपुर बार्डर पर 150 दिन से धरना दे रहे कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारी कोरोना के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं। बार्डर पर प्रदर्शनकारी न मास्क लगा रहे हैं और न ही शारीरिक दूरी का पालन कर रहे हैं। ऐसे में हर बार्डर पर एक सौ से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को खांसी, जुकाम जैसे लक्षण आ रहे हैं।

कोरोना टेस्ट नहीं करवा रहे किसान आंदोलनकारी

अनुमान लगाया जा रहा है कि 15 फीसद प्रदर्शनकारी इस समय बीमार हैं। कोरोना टेस्ट वह करवा नहीं रहे हैं, इसलिए संक्रमण का पता नहीं लग पा रहा है। नतीजन ये बीमार प्रदर्शनकारी दूसरे प्रदर्शनकारियों व आसपास के गांवों में बिना रोकटोक घूम रहे हैं। सिंघु बार्डर-नरेला रोड पर यह आमतौर पर देखने को मिलता है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी दिल्ली में नरेला, बवाना तक बिना मास्क के ही आते जाते रहते हैं। इनको न तो पुलिस का डर है और न ही जुर्माने का। ऐसे में प्रदर्शनकारी खुद की जान के दुश्मन तो बन ही रहे हैं, साथ ही दिल्लीवासियों के जान के भी दुश्मन बने हुए हैं।

नरेला रोड पर नहीं काटे जा रहे मास्क न लगाने वालों के चालान

कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिस के सामने लाकडाउन की धज्जियां उड़ाते हैं। नरेला रोड पर मास्क न लगाने पर चालान भी नहीं काटे जा रहे। सिंघु बार्डर पर नहीं हो रही कोरोना जांच सिंघु बार्डर पर दिल्ली की सीमा में सरकार की ओर से कोई भी कोरोना जांच केंद्र नहीं खोला गया है। इसके साथ-साथ नरेला रोड पर भी कोई जांच नहीं की जा रही। यहां से हर रोज लोग दिल्ली-हरियाणा में आवागमन करते हैं। टेस्ट न होने का फायदा उठाकर प्रदर्शनकारी दिल्ली के लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।

आसपास के गांवों के लोग सबसे ज्यादा खतरे में

सिंघु बार्डर के आसपास के गांव के लोगों को हरियाणा से दिल्ली आवागमन करने के लिए प्रदर्शनकारियों के बीच से ही गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में इन गांवों के लोगों की जान सबसे ज्यादा खतरे में है। सिंघु बार्डर पर काम करने वाले कामगार अखिलेश ने कहा कि कोई भी प्रदर्शनकारी मास्क नहीं लगा रहा है। ऐसे में आसपास के लोग कोरोना की चपेट में आ सकते हैं।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari