नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित की मुलाकात पर भाजपा ने निशाना साधा है। भाजपा का कहना है कि बिजली बिल से स्थायी शुल्क को कम करने के लिए दोनों नेताओं के बीच बैठक एक छलावा है। पहले कांग्रेस और अब आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के साथ मिलकर दिल्लीवासियों को लूट रही है।

दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का कहना है कि जनता से लूटा गया पैसा आप सरकार को वापस लौटाना पड़ेगा। दिल्ली की जनता आप व कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में सबक सिखाएगी। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार से दोनों पार्टियां बौखला गई हैं। चुनाव के दौरान भी दोनों पार्टियों के नेता गठबंधन के लिए बार-बार बैठक कर रहे थे। अब जनता से लूटे गए सात हजार करोड़ रुपये लौटाने के लिए भाजपा ने दबाव डाला तो फिर से दोनों पार्टियों के नेता बैठक करने लगे। यह जनता को गुमराह करने की साजिश है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने साढ़े चार वर्षो से दिल्ली का विकास रोकने वाली आप के उम्मीदवारों की जमानत जब्त करके केजरीवाल को सबक सिखाया है। मनोज तिवारी ने कहा कि घबराहट में वह बिना योजना बनाए आनन-फानन में कभी मुफ्त यात्रा की घोषणा कर देते हैं तो कभी अपने मंत्रियों को जल्दी-जल्दी काम करने का आदेश देकर लोगों को गुमराह करते हैं।

वहीं, प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की कोशिश शुरू हो गई है। कल तक हारून यूसुफ सहित अन्य कांग्रेस नेता 14 माह से वसूले जा रहे बिजली के स्थायी शुल्क को घोटाला बताते हुए उपभोक्ताओं को पैसे वापस करने की मांग कर रहे थे, लेकिन बैठक के बाद वे मुख्यमंत्री और बिजली वितरण कंपनियों का बचाव करते दिखे। वे उपभोक्ताओं से वसूले गए पैसे वापस किए जाने की मांग भी भूल गए।

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