नई दिल्ली (जेएनएन)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय वामपंथ छात्र संगठनों का गढ़ माना जाता है। बीते कुछ वर्षों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) तेजी से यहां उभरा है। जो वामपंथ संगठन को अकेले ही कड़ी चुनौती दे रहा है। यही वजह है कि 2018 के जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में भी सभी चार पदों पर एबीवीपी के उम्मीदवार ही दूसरे नंबर पर रहे हैं। खास बात है कि उसे चुनाव में पिछले साल की तुलना में 379 वोट अधिक मिले हैं।

विद्यार्थियों के बीच हमें पसंद किया जा रहा है 
एबीवीपी के जेएनयू यूनिट के अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि हमारे संगठन ने इस चुनाव में दिन-रात मेहनत की और एकजुट होकर हम छात्रसंघ चुनाव लड़े। हर साल वामपंथ छात्र संगठनों की ओर से अलग-अलग उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाता है। वामपंथ संयुक्त मोर्चा में कई ऐसे भी छात्र संगठन हैं, जिनके विचार एक-दूसरे से नहीं मिलते। हमारा संगठन अपने विचारों को प्रमुखता देता रहा है और आगे भी देगा। हम राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दे उठाते हैं और यह हमारे लिए जीत है कि जेएनयू कैंपस में विद्यार्थियों के बीच हमें पसंद किया जा रहा है। आने वाले समय में हमारा संगठन जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में अधिक मतों से जीत हासिल करेगा।

मत फीसद बढ़ा है
वहीं जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे ललित पांडेय ने कहा कि एबीवीपी संगठन मजबूती से खड़ा है और आगे भी वामपंथ संगठनों की विचाराधारा को ध्वस्त करने के लिए काम करता रहेगा। पिछले साल की तुलना में हमारा मत फीसद बढ़ा है और हमें चारों पदों पर ज्यादा वोट मिले हैं।

एबीवीपी को मिले वोट

2017-2018 

अध्यक्ष 1042 982
उपाध्यक्ष 1028 1012
महासचिव 975 1123
संयुक्त सचिव 920 1247
कुल मत 3985 4364