नई दिल्ली (राहुल मानव)। Presidential Debate in JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रात 9 बजे से गंगा ढाबे पर छात्र जुटने लगे। यहां जेएनयू छात्र संघ चुनाव के तहत प्रेसिडेंशियल डिबेट आयोजित की गई। इस वर्ष छह उम्मीदवार अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं। बापसा से जितेंद्र सुना, छात्र राजद से प्रिंयका भारती, लेफ्ट यूनिटी से आईशी घोष, निर्दलीय उम्मीदवार राघवेंद्र मिश्र, एबीवीपी से मनीष जांगिड और एनएसयूआइ से प्रशांत कुमार चुनावी मैदान में हैं।

हर उम्‍मीदवार को 12 मिनट का समय

रात 12 बजे तक अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मनीष जांगिड, प्रशांत कुमार और राघवेंद्र मिश्र ने अपनी बातें रखी। बहस के दौरान प्रत्येक उम्मीदवार को 12 मिनट का समय दिया गया। बहस के दौरान होने वाली नारेबाजी से खलल होने पर छात्र संघ चुनाव के मुख्य चुनाव अधिकारी शशांक पटेल ने नारेबाजी बंद करने की अपील की। इसी बीच राघवेंद्र मिश्र जब बोल रहे थे तो बहस को माइक खराब होने की वजह से आधे घंटे के लिए रोकना पड़ा।

उम्‍मीदवारों ने छात्रों के सवाल के दिए जवाब
उम्मीदवार द्वारा अपनी बात पूरी करने के बाद उसे छात्रों के सवालों का जवाब देना होता है। इसी बीच एक दिव्यांग छात्र ने कहा कि उसे सवाल नहीं पूछने दिया गया। एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मनीष जांगिड ने अपने संबोधन में कहा कि जेएनयू में राजनीति एबीवीपी के इर्द गिर्द ही घूमती है। उन्होंने आइसा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने जेएनयू प्रवेश परीक्षा की नीति का विरोध किया, जब इन मुद्दों के बारे में इनसे सवाल पुछते हैं तो ये जवाब नहीं दे पाते।

उठा कश्‍मीर में धारा 370 हटाने का मुद्दा
मनीष ने कहा कि कैंपस में कुछ लोग नारीवादी होने का दावा करते हैं लेकिन छात्रओं के असल मुद्दों को उठाने से कतराते हैं। उन्होंने जम्मू- कश्मीर से धारा 370 को हटाने के सरकार के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी एक है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना सच हुआ। 

हुई एकता की बात
इसके बाद मनीष ने आइसा को घेरते हुए कहा कि 1990 से 2018 तक आइसा छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ता आया है लेकिन इस बार उनके कोई उम्मीदवार नहीं था इसलिए एसएफआई को वाम एकता का सहारा लेना पड़ा।

कश्मीर की जमीन को हथियाने के लिए प्रयास गलत
एनएसयूआइ के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार प्रशांत कुमार ने देश के चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैं जेएनयू छात्र संघ चुनाव समिति का निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए धन्यवाद करता हूं। उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर कहा कि नियमों को ताक पर रखकर यह फैसला लिया गया। जब से देश आजाद है कश्मीर के लोग परेशान हैं। कश्मीर की जमीन को हथियाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, यह गलत है।

नौकरी की कमी 
देश में एनआरसी के बूते पर असम के लोगों के साथ सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है। देश में 2 करोड़ युवाओं को नौकरी देने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली। अब देश में आर्थिक मंदी का दौर है। कैंपस में एमबीए के छात्रों से कई गुना फीस ली जा रही है। इनसे 12 लाख रुपये तक कि फीस ली जा रही है। मैं इनके साथ हूं। साथ ही एससी और एसटी छात्रों के साथ हूं उनके हक की लड़ाई लड़ रहा हूं और उनकी समस्याओं के समाधान की कोशिश रहेगी।

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Posted By: Prateek Kumar

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