यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विवादों के कारण जेएनयू के प्रॉक्टर ने दिया इस्तीफा
जेएनयू प्रशासन ने प्रो. एके डिमरी का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद मंगलवार शाम स्पेशल सेंटर ऑफ मॉलेक्युलर मेडिसिन की प्रोफेसर विभा टंडन को प्रॉक्टर नियुक्त कर दिया।

नई दिल्ली [जेएनएन]। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन दोतरफा चुनौतियों से जूझ रहा है। छात्र संघ और शिक्षक संघ के लगातार चल रहे विरोध के बाद अब प्रशासन की अंदरूनी कलह भी खुलकर सामने आ गई है। प्रॉक्टर प्रो. एके डिमरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जेएनयू प्रशासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बाद मंगलवार शाम स्पेशल सेंटर ऑफ मॉलेक्युलर मेडिसिन की प्रोफेसर विभा टंडन को प्रॉक्टर नियुक्त कर दिया।
प्रशासन के स्तर पर प्रो. डिमरी ने कई अहम फैसले लिए और छात्रों को नोटिस भी थमाए। मामला चाहे गत वर्ष 9 फरवरी को जेएनयू में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का हो या छात्र नजीब अहमद के लापता होने का हो या फिर जेएनयू विद्वत परिषद की बैठक के दौरान हंगामा करने वाले आठ छात्रों के निलंबन का हो।
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वह प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहते थे, लेकिन उच्च स्तर पर लगातार हस्तक्षेप के बाद उन्होंने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। इस बाबत प्रो. डिमरी ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया। वहीं मंगलवार को भी कैंपस में छात्र संघ द्वारा की गई हड़ताल का कोई खास असर नहीं दिखाई दिया। कुछ लोगों ने प्रशासनिक भवन के बाहर प्रदर्शन किया। छात्र संघ के बीच इस बात की चर्चा है कि प्रॉक्टर का इस्तीफा नजीब प्रकरण और आरक्षित वर्ग के छात्रों के निलंबन में जेएनयू प्रशासन की छवि धूमिल होने के कारण हुआ है।
जेएनयू प्रशासन ने अनशन तोड़ने की अपील की
एमफिल और पीएचडी दाखिले के लिए मौखिक परीक्षा के अंक को अधिक वरीयता देने के मुद्दे पर भूख हड़ताल पर बैठे ओबीसी फोरम के छात्रों से प्रशासन ने अनशन वापस लेने की अपील की है। छात्र दिलीप की तबीयत बिगड़ने पर जेएनयू प्रशासन ने अनशन तोड़ने को कहा। इसके साथ ही यह भी दोहराया कि एमफिल और पीएचडी के मसले पर निर्णय यूजीसी के निर्देश पर लिया गया है। छात्र 20 जनवरी से हड़ताल पर बैठे हैं।
