नई दिल्ली/गाजियाबाद (जेएनएन)। प्रसिद्ध जैन मुनि तरुण सागर महाराज को उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में समाधि दी जाएगी। तरुण सागर की अंतिम यात्रा मुरादनगर तीर्थ पहुंच चुकी है। अंतिम यात्रा के दौरान हज़ारों की भीड़ उनके पीछे-पीछे चल रही है। यहां के तरुण सागरम तीर्थ पर श्रद्धालुओं का हुजूम लगा हुआ है। जैन मुनि सौरभ सागर तरुण सागर जी महाराज का अंतिम संस्कार कराने पहुंच चुकेे हैं। 24 फरवरी 2017 को तरुण सागर महाराज ने अंतिम बार मुरादनगर स्थित तरुण सागरम तीर्थ में प्रवचन दिया था।  

बड़ी संख्या में कारें सड़क के आसपास खड़ी है, जिससे हाईवे पर भीषण जाम लग गया है। हालांकि, पुलिस इसके मद्देनजर रूट डायवर्जन किया है, लेकिन इसका कम ही असर दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं भी पैदल चल रहीं हैं।

गौरतलब है कि जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने शनिवार सुबह दिल्ली में देह त्याग दिया था। वह 51 वर्ष के थे। उनकी हालत कई दिनों से गंभीर बनी हुई थी। मैक्स अस्पताल की ओर से कहा गया था कि उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज ने शनिवार सुबह तीन बजे देह त्याग दी। बताया जा रहा है कि कृष्णा नगर के राधे पूरी एक घर में उन्होंने अंतिम सांस ली।

दिल्ली के शाहदरा से जैन मुनि के पार्थिव शरीर को समाधि के लिए गाजियाबाद के मुरादनगर ले जाया जा रहा है। दिल्ली में इस दौरान जैन समुदाय से जुड़े सैकड़ों लोग यात्रा में शामिल हुए। बारिश के दौरान भी यात्रा नहीं रुकी।

गाजियाबाद के रास्ते जैन मुनि के शव को राधे पुरी से मोदीनगर (यूपी) ले जाया जा रहा है। यहां पर तरुण सागर जी नाम से एक आश्रम है, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर शव यात्रा के दौरान  सैकड़ों लोग शामिल थे।

बताया जा रहा है कि जैन मुनि तरुण सागर बुखार और पीलिया की बीमारी से जूझ रहे थे। वैशाली के मैक्स अस्पताल में उन्हें करीब 15 दिन तक भर्ती रखा गया था। उनके कुछ शिष्यों ने जानकारी दी है कि जैन मुनि जी को कैंसर की बीमारी थी, जिसका वह पिछले काफी समय से सामना कर रहे थे। गत 30 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी करवाकर उन्हें कृष्णा नगर के राधे पुरी लाया गया था। जैन मुनि राधे पूरी में एक समुदाय के घर में गत 27 जुलाई से चातुर्मास कर रहे थे। यह फोटो अस्पताल से राधे पूरी लाने के दौरान की है।

वहीं, डॉक्टरों के हवाले से कहा जा रहा है कि 15 दिन पहले पीलिया की शिकायत मिलने के बाद तरुण सागर महाराज को मैक्स अस्पताल में लाया गया था, लेकिन ई्लाज के बाद भी उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। बुधवार को उन्होंने आगे इलाज कराने से मना कर दिया और अपने अनुयायियों के साथ बृहस्पतिवार शाम कृष्णा नगर (दिल्ली) स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल आ गए थे। यहां पर भी वह लगातार डॉक्टरों की निगरानी में थे।

तरुण सागर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है। उन्होंने शोक संदेश के साथ जैन मुनि के साथ अपनी एक फोटो भी ट्वीट की है। ट्वीट में लिखा है- 'जैन मुनि तरुण सागर के निधन पर गहरा दुख हुआ है। हम उन्हें उनके उच्च विचारों और समाज के लिए योगदान के लिए याद करेंगे। उनके विचार लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।' 

वहीं, गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी शोक जताते हुए ट्वीट किया है- 'जैन मुनि श्रद्धेय तरुण सागर जी महाराज के असामयिक महासमाधि लेने के समाचार से मैं स्तब्ध हूं। वे प्रेरणा के स्रोत, दया के सागर एवं करुणा के आगार थे। भारतीय संत समाज के लिए उनका निर्वाण एक शून्य का निर्माण कर गया है। मैं मुनि महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।'

उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी जैन मुनि तरुण सागर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा- 'उनके शिक्षा और विचार लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।'

आयुर्वेदिक तरीके से चल रहा था इलाज

पिछले दिनों तरुण सागर के शिष्य ब्रह्माचारी सतीश ने जानकारी दी थी कि तरुण सागर तेज बुखार और पीलिया की बीमारी से पीड़ित थे। पीलिया उन्हें काफी ज्यादा था। संथारा व समाधि पर उन्होंने कहा था कि ऐसा अभी कुछ नहीं है। आयुर्वेदिक तरीके से महाराज का इलाज चल रहा था।

उनकी गंभीर हालत को देखते हुए तरुण सागर के प्रवास स्थल पर उनके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु आने लगे थे, यह सिलसिला शनिवार शाम तक जारी था। इस दौरान उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए जगह-जगह प्रार्थना की जा रही थी, जिस कमरे में उन्हें रखा गया था, वहां पर केवल अन्य जैन मुनियों व शिष्यों को जाने की ही इजाजत थी। शुक्रवार को प्रवास स्थल के बाहर जुटे सैकड़ों श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए तरुण सागर चार बार मकान की बालकनी में आए और फिर अंदर चले गए थे।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को उन्होंने खाना पीना छोड़ दिया था। जब यह सूचना अन्य जैन मुनियों को लगी तो वह राधेपुरी पहुंचे और उन्होंने तरुण महाराज को समझाया था कि अभी समाज को उनकी जरूरत है। वह इस तरह का फैसला अभी न लें। जैन मुनियों के समझाने पर उन्होंने थोड़ा बहुत खाना खाया था।

Posted By: JP Yadav