पूर्वी दिल्ली,जेएनएन।  पूर्वी जिले के स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर को लुटेरे से संपर्क रखना भारी पड़ गया। इसकी वजह से पुलिस के हाथ आ चुका लुटेरा गिरफ्त से बाहर निकल गया, लेकिन कुछ दिन बाद लुटेरे को दूसरी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जब संपर्क का भेद खुला तो स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर विदेश सि‍ंघल को वरिष्ठ अधिकारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसके साथ ही उनका तबादला भी हो गया।

छिन गया व‍िभाग
उन्हें स्पेशल स्टाफ से हटाकर डीआइयू (जिला जांच दल) में भेज दिया गया है। पुलिस उपायुक्त पंकज कुमार  सिंह ने तबादले की पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने कारण नहीं बताए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जगतपुरी में 17 सितंबर को एक कारोबारी से 2.7 लाख रुपये लूटे गए थे।

गोलीबारी में एक घायल 
इस दौरान बदमाशों की गोली से कारोबारी का एक कर्मचारी घायल हो गया था। इस मामले की जांच में स्थानीय पुलिस के साथ स्पेशल स्टाफ भी जुटी थी। स्पेशल स्टाफ की टीम ने डंप डाटा (घटनास्थल के आसपास चालू सिम) के जरिये दो मोबाइल नंबरों की पहचान की। जांच में पता चला कि एक सिम गाजियाबाद के कुख्यात बदमाश नवीन कसाना के पास थी।

नवीन के खिलाफ मकोका सहित 18 मामले दर्ज
नवीन कसाना के खिलाफ मकोका सहित 18 मामले दर्ज थे, लेकिन वह स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर विदेश सि‍ंघल के संपर्क में था। सि‍ंघल  ने कसाना से फोन पर बात की तो उसने बता दिया कि उसका लूटपाट में हाथ नहीं है। सिम उसने किसी और को दिया था। उसने वादा किया कि वह लूटपाट करने वालों को पकड़वा देगा।

जांच में कुछ और निकला मामला
इसकी जानकारी पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी दी गई थी। वारदात के करीब एक महीने बाद जगतपुरी पुलिस टीम मामले की जांच करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंच गई कि वारदात में नवीन कसाना ही मुख्य रूप से शामिल था। इसकी जानकारी नवीन कसाना को मिल गई।

चला गया जेल
वह एक पुराने मामले में अपनी जमानत तुड़वाकर गाजियाबाद स्थित डासना जेल चला गया। हालांकि पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर ले आई। नवीन की गिरफ्तारी के बाद यह पता चला कि वह काफी समय से विदेश सि‍ंघल के संपर्क में था। इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया। हालांकि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच नहीं की गई। यह भी पता चला कि नवीन के संपर्क कई आला पुलिस अधिकारियों से भी हैं।