नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। वर्ष 2021 दिल्ली पुलिस के लिए काफी चुनौती भरा साल रहा। कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों की हरकतों से सालभर पुलिस जूझती रही। पुलिस हमेशा इस बात को लेकर शंकित दिखी कि कहीं प्रदर्शनकारी 26 जनवरी को किया गया उपद्रव न दोहरा दें। इन संभावनाओं के चलते पुलिस ने अपनी पूरी ताकत राजधानी की सीमाओं पर ही लगाए रखी। इसके बीच ही अप्रैल के अंत में कोरोना की दूसरी लहर भी पुलिस के सामने दूसरी बड़ी चुनौती के रूप में आई इससे दिल्लीवासियों को बचाने, उन्हें जागरूक करने, आक्सीजन सिलेंडरों का बंदोबस्त करने और लोगों को हर तरह की सहायता प्रदान करने में पुलिस सफल रही। पुलिस ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की जिसे देशभर में सराहा गया।

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान बेहतर काम करने के लिए तत्कालीन पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव को जून में सेवा विस्तार देने की खूब चर्चा हुई, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 1988 बैच के आइपीएस बालाजी श्रीवास्तव को नया पुलिस आयुक्त बना दिया गया। इससे 1987 बैच के आइपीएस ताज हसन को दिल्ली पुलिस से हटाना पड़ा। 27 दिन बाद ही बालाजी को अचानक आयुक्त पद से हटाकर गुजरात कैडर के आइपीएस राकेश अस्थाना को पुलिस आयुक्त बनाने पर महकमे में सनसनी फैल गई। अजय राज शर्मा के बाद दूसरी बार गैर यूटी कैडर के आइपीएस को दिल्ली पुलिस का मुखिया बनाने पर यूटी कैडर के आइपीएस में असंतोष देखा गया। रोष तब बढ़ गया जब केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर हलफनामे में यह कहा कि यूटी कैडर में आयुक्त पद के लिए वर्तमान में कोई उपयुक्त आइपीएस नहीं है। अस्थाना के पुलिस आयुक्त बनने के बाद शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक कई बदलाव हुए। ऐसा पहली बार हुआ जब यूटी कैडर के कई वरिष्ठ आइपीएस दिल्ली पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर अन्य बलों में चले गए। अस्थाना ने दिवंगत पूर्व पुलिस आयुक्त वाइएस डडवाल की तरह ही फोर्स को और अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में एक के बाद एक कई फैसले लिए।

अपराध के नए पैटर्न ने लोगों को किया हैरान

2021 में अपराध के कई नए पैटर्न देखे गए। रोहिणी कोर्ट में जज के सामने गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ गोगी की हत्या हुई। इस तरह का अपराध पहली बार दिल्ली में देखने मिला। इसको लेकर पुलिस पर सवाल उठे। जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने जेलकर्मियों को अपनी साजिश में शामिल कर 200 करोड़ की ठगी की वारदात को अंजाम दिया। इस मामले ने राजधानी की जेलों में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी।

बड़ी घटनाओं में उलझी रही पुलिस

10 फरवरी: मंगोलपुरी में समुदाय विशेष के लोगों ने बजरंग दल के कार्यकर्ता रिंकू शर्मा की हत्या कर दी थी। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर जागरूकता रैली निकालने को लेकर विवाद में वारदात को अंजाम दिया था।

25 मार्च 2021: गोगी गैंग का सबसे कुख्यात बदमाश कुलदीप फज्जा जीटीबी अस्पताल से फरार हो गया था। फज्जा के फरार होने से दिल्ली पुलिस की भारी किरकिरी हुई थी। हालांकि तीन दिन बाद ही स्पेशल सेल ने फज्जा का रोहिणी में पता लगा मुठभेड़ में ढेर कर दिया था।

5 मई 2021: छत्रसाल स्टेडियम में ओलिंपियन सुशील पहलवान ने 15-20 साथियों के साथ मिलकर उभरते हुए पहलवान सागर धनखड़ की बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

24 जून : आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोप में स्पेशल सेल ने कारगिल से चार आतंकियों को गिरफ्तार किया

14 जुलाई: अपराध शाखा ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए जासूसी करने के आरोप में बीकानेर के रहने वाले हबीब खान और सेना के एक लांस नायक को गिरफ्तार किया।

31 जुलाई 2021: स्पेशल सेल ने कुख्यात काला जठेड़ी और उसकी मित्र रिवाल्वर रानी को गिरफ्तार किया। सेल की यह बड़ी उपलब्धि रही।

4 अगस्त : हत्या सहित अनेक अपराध के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद अंकित गुज्जर की जेल में हत्या कर दी गई। जेलकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया

8 अगस्त: न्याय नहीं मिलने पर दुष्कर्म पीड़िता युवती और उसके पुरुष मित्र ने सुप्रीम कोर्ट के बार आग लगाकर आत्महत्या की। मऊ जिले की घोसी लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के सांसद अतुल राय पर युवती ने दर्ज कराया था दुष्कर्म का मुकदमा।

14 सितंबर : स्पेशल सेल ने छह आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनमें दो आतंकी पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आए थे। ये सभी आतंकी दिल्ली समेत यूपी, महाराष्ट्र और अन्य जगहों पर धमाकों की साजिश रच रहे थे।

झपटमारी और वाहन चोरी पर नहीं लगा अंकुश

दिल्ली में हर दिन 100 से ज्यादा झपटमारी की वारदातें होती हैं। कोरोना महामारी में झपटमारी की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यही हाल वाहन चोरी की घटनाओं का है। हर दिन दिल्ली से 125 से ज्यादा वाहन चोरी होते हैं। 30 नवंबर तक इस साल 31,239 वाहन चोरी हुए जिसमें कार चोरी के 6,161 और बाइक चोरी के 25,078 मामले शामिल हैं। इनमें 495 कारें व 3,329 बाइक ही पुलिस बरामद कर पाई।

देश की छवि हुई धूमिल

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर निकाली गई किसानों की ट्रैक्टर रैली ने पुलिस की नाक में दम कर दिया। पुलिस उपद्रवियों पर काबू पाने में असहाय दिखी। लालकिला के प्राचीर पर धार्मिक झंडा फहरा निहंगों और अन्य ने जिस तरह से उपद्रव किया उससे देश की छवि धूमिल हुई। दिल्ली ही नहीं देश वासियों को उक्त घटना ने झकझोर कर रख दिया। उक्त घटना के बाद साइबर सेल द्वारा टूलकिट मामले से संबंधित कुछ आरोपितों को गिरफ्तार करने पर सियासत शुरू हो गई थी। पुलिस का दावा था कि टूलकिट के जरिये ही 26 जनवरी को हुई ¨हसा के लिए लोगों को भड़काया था।

आयुक्त के कुछ अहम फैसले

  • छह जिलों में महिला डीसीपी की तैनाती की गई। पहली बार दिल्ली में ऐसा देखने को मिला जब इतने जिलों की कमान महिला आइपीएस को सौंपी गई।
  • नौ थानों में महिला इंस्पेक्टरों को थानाध्यक्ष बनाया गया। मध्य जिला में एक ऐसी पुलिस चौकी बनाई गई जहां अधिकतर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
  • पीसीआर यूनिट को खत्म कर उसे सभी 15 जिला पुलिस के साथ समाहित कर दिया गया।
  •  सभी थानों में तीन-तीन इंस्पेक्टरों की तैनाती की गई और उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई।
  •  स्पेशल सेल का विस्तार कर तीन रेंज से पांच रेंज बनाई गई।
  •  लंबे समय से अलग-अलग थानों में थानाध्यक्षों की जिम्मेदारी संभालने वाले अनुभवी इंस्पेक्टरों और सब डिवीजन में तैनात एसीपी को हटाकर नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी

दुष्कर्म की हुई कई वारदातें

 अक्टूबर में रंजीत नगर में सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म।

 11 अगस्त : मयूर विहार इलाके में तमिलनाडु के रहने वाले एक शख्स ने छह वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया

2 अगस्त : दिल्ली कैंट में नौ वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस को बिना बताए बच्ची का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था।

15 नवंबर : महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। आरोपित ने महिला का निजी अंग जलाकर शव को मधु विहार में नाले के पास फेंक दिया था।

Edited By: Jp Yadav