नई दिल्ली [बिरंचि सिंह]। वंदे भारत मिशन के सातवें दिन विदेशों में फंसे भारतीयों को लेकर एयर इंडिया के विमान शाम को बारी-बारी से एक-एक घंटे के अंतराल पर उतरे। इन यात्रियों की एक घंटे तक इमिग्रेशन में कागजों की जांच की गई और एक घंटे तक आइसोलेशन सेंटर में जांच के लिए रखा गया। इसके पहले एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग हुई। बुधवार शाम साढ़े बजे दुबई से पहला विमान उतरा औैर एक-एक घंटे के अंतराल पर दुबई से दो और विमान उतरे। रात 10.30 बजे फिलीपींस का विमान आया। सभी विमान में दो से ढाई सौ यात्री मौजूद रहे। विदेश से आए इन भारतीय यात्रियों की जांच के बाद क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया।

दिल्ली में आठ होटलों में इनके लिए पेड क्वारंटाइन की व्यवस्था है। इसके लिए आइजीआइ एयरपोर्ट पर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसीटीसी) और गुरुग्राम से हरियाणा रोडवेज की बसें भी पहुंच चुकी थीं। बुधवार को विदेश से आने वालों से मिलने वाले भी पहुंचे थे। जो अपने बेटे, बेटी और पत्नी की परेशानी से परेशान थे। वे उन्हें होम क्वारंटाइन रखना चाहते थे, लेकिन यहां पर उनकी कोई सुनने वाला नहीं रहा। इससे भी वे ज्यादा विचलित दिख रहे थे। हालांकि, छह दिन से जो भी लोग विदेश से विमान से आइजीआइ एयरपोर्ट पर उतर रहे थे वे किसी न किसी बहाने होम क्वारंटाइन के लिए आग्रह करते रहे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी। किसी को भी होम क्वारंटाइन की इजाजत नहीं मिल रही है।

बुधवार को दुबई से आने वाले यात्रियों के स्वजन परिवार के सदस्यों के मोबाइल की सिम, मोबाइल व घर का खाना देने का आग्रह करते रहे, लेकिन पुलिस ने क्वारंटाइन सेंटर से उन्हें दूर ही रखा। दक्षिणी दिल्ली निवासी अरुण लाल साहनी पेशे से हेयर कट स्टाइलिस्ट हैं। इनकी परेशानी यह है कि उनकी पत्नी के पेट में तीन माह का बच्चा है और हालत नाजूक है, इसलिए उन्होंने उन्हें दुबई से दिल्ली बुला लिया। घर पर क्वारंटाइन करने को लेकर वे पुलिस, प्रशासन और डाक्टरों से अनुरोध करते रहे। अरुण लाल साहनी का कहना है कि उनकी पत्नी की दुबई में कोरोना वायरस की जांच हो चुकी है उनमें किसी तरह का संक्रमण का लक्षण नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी का दुबई के जिस अस्पताल में इलाज चल रहा है उसकी रिपोर्ट को भी अधिकारियों के सामने रखा, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। दक्षिणी दिल्ली निवासी ग्लोबल वेलनेस फाउंडेशन के चेयरमैन डाक्टर संतोष कुमार बागले का बेटा दुबई में अकेला रह रहा था, इसलिए उसे बुला लिया। चूंकि उनका दिल्ली का मकान खाली पड़ा है। इसलिए उन्होंने अपने बच्चे को घर पर क्वारंटाइन करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से अनुमति मांगी थी। उनका आवेदन भी नई दिल्ली जिला प्रशासन तक पहुंच गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अरुण लाल साहनी और डॉक्टर संतोष कुमार दोनों ने बारी बारी से नई दिल्ली एसडीएम हेडक्वार्टर राकेश दहिया से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने यह कहकर हाथ खड़े कर लिए कि वे इस मामले में किसी तरह की मदद करने में अक्षम हैं।

Posted By: JP Yadav

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