नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। अरुण जेटली स्टेडियम में रविवार रात बिजली वितरण कंपनी बीवाईपीएल ने अपने ग्रिड की बिजली से बिना किसी बाधा के भारत और बांग्लादेश के बीच अन्तरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट मैच संपन्न कराया। इसके लिए पावर बैकअप या जेनरेटर नहीं था। मैच पूरी तरह से ग्रिड की बिजली पर निर्भर था। मैच के सफल आयोजन को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं, लेकिन, बीवाईपीएल के इंजीनियरों ने आशंकाओं को गलत साबित कर दिया।

आमतौर पर जेनरेटर के सहारे ही अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेले जाते हैं, ताकि मैच के दौरान बिजली संबंधी कोई दिक्कत न आए। ग्रिड की बिजली में तकनीकी फॉल्ट की आशंका बनी रहती है, लेकिन, अरुण जेटली स्टेडियम में हुए क्रिकेट मैच का मामला कुछ और था। दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने डीजल जेनरेटरों के इस्तेमाल पर रोक लगाई हुई है, इसलिए मैच के दौरान डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था। यदि जेनरेटर का इस्तेमाल किया जाता तो वातावरण में 7500 लीटर डीजल का धुआं घुलता, इससे 20 टन कार्बन का उत्सजर्न होता।

डीडीसीए के पास 1800 किलोवॉट बिजली का कनेक्शन था। उसने और 1500 किलोवॉट के अतिरिक्त लोड के लिए बीवाईपीएल से संपर्क किया। इस तरह, स्टेडियम में कुल 3300 किलोवॉट यानी 3.3 मेगावॉट बिजली की जरूरत थी। एक तो बिजली की इतनी बड़ी मांग और दूसरा अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीवाईपीएल ने दिन-रात कार्य किया और न सिर्फ नेटवर्क का विस्तार किया, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों, जैसे- पार्शल डिस्चार्ज टेस्टिंग, 10 डेल्टा टेस्टिंग, थर्मल स्कैनिंग, डीजी लॉजिक टेस्ट का इस्तेमाल कर बिजली वितरण सिस्टम को सुचारू किया।

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Posted By: JP Yadav

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