नई दिल्ली [राहुल सिंह]। राधा-कृष्ण, सीता-राम व अन्य भगवानों को रंग बिरंगी कपड़ों में बहुत मनमोहक दिखाने वाली पोशाक अब कूड़े के ढेर में नहीं जाया करेंगी। दरअसल खादी ग्राम उद्योग से जुड़े लोग मंदिरों में जाकर इन पोशाकों को खरीद रहे हैं और इनका इस्तेमाल कर पोटली तैयार कर बेचने का काम कर रहे हैं। इस तरह के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए खादी ग्राम उद्योग के पवेलियन में स्टाल लगाया गया है, जहां पोशाक को काटकर लोगों के सामने पोटली तैयार की जा रही है, जिसे वह शादी व अन्य समारोह में प्रयोग कर सकते हैं।

इसके अलावा कपड़े के लिफाफे भी तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें शगुन रखकर दिया जा सकता है।प्रगति मैदान में व्यापार मेले में एक हाल में खादी ग्राम उद्योग का एक अलग से पवेलियन बनाया गया है। इसमें देश भर के राज्यों में तैयार होने वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शित किया गया है। इसमें पोटली, लिफाफे विशेष तौर से आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जो पर्यटकों के सामने तैयार किया जा रहा है।

ये मथुरा वृंदावन, बनारस, गुजरात, हरिद्वार समेत अन्य जगहों के मंदिरों से निकलने वाली पोशाक से बनाया जा रहा है। इसके अलावा मंदिरों में प्रयोग के बाद फेंके जाने वाले फूलों से अगरबत्ती और धूप भी बनाई जा रही है, जिसे लोगों के सामने मशीन से बनाकर दिखाया जा रहा है। खादी ग्राम उद्योग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना के अनुसार लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दिल्ली के राजघाट स्थित केंद्र में ये सिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए मशीन का प्रयोग किया जा रहा है, जो बहुत आसान तरीके से बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चाक का इस्तेमाल करने में लोगों को बहुत परेशानी होती थी, जिसके बाद ये मशीन का तरीका अपनाया जा रहा है। वहीं, कश्मीर के पश्मीना शाल भी चरखे की मदद से बनाना सिखाया जा रहा है।

Edited By: Pradeep Chauhan