नोएडा (जेएनएन)। आपने अब तक खातों का या बैंक ऑडिट आदि तो सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी सड़कों का सुरक्षा ऑडिट सुना है। सुनने में ये थोड़ा नया लग रहा होगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक दिल्ली, एनसीआर, यूपी व राजस्थान को जेड़ने वाले एक एक्सप्रेस-वे के सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया है। यहां हम बात कर रहे हैं गंभीर सड़क दुर्घटनाओं के लिए बदनाम हो चुके यमुना एक्सप्रेस-वे की। यमुना एक्सप्रेस-वे के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए इसका सुरक्षा ऑडिट होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सड़क सुरक्षा के लिए गठित समिति ने ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट से आगरा तक के 165 किमी लंबे इस पूरे एक्सप्रेस-वे का जल्द सुरक्षा ऑडिट कराने का आदेश दिया है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर यमुना एक्सप्रेस-वे को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

यमुना प्राधिकरण के सीईओ डा. अरूणवीर सिंह ने बताया कि यमुना एक्सप्रेस-वे का आइआइटी दिल्ली से सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। सड़क सुरक्षा के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की समिति ने सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। ऑडिट में सुझाए गए उपायों पर जेपी इंफ्राटेक को तुरंत पालन करने के आदेश दिए जाएंगे। जेपी इंफ्राटेक को इस संबंध में पहले ही सूचित कर दिया गया है।

तीन संस्थाओं को सुरक्षा ऑडिट के लिए दिया था प्रस्ताव

सड़क सुरक्षा के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की समिति ने यमुना प्राधिकरण को एक्सप्रेस-वे का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। प्राधिकरण ने ऑडिट के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, आइआइटी रुड़की एवं आइआइटी दिल्ली को प्रस्ताव दिया था। आइआइटी रुड़की ने कुछ कारणों से ऑडिट करने से इन्कार कर दिया था। वहीं केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान का शुल्क अधिक था। इसलिए आइआइटी दिल्ली को ऑडिट के लिए चुना गया है। ऑडिट के लिए आइआइटी दिल्ली करीब 31 लाख रुपये लेगा।

तीन माह में होगी जांच, मार्च तक लागू होंगे सुझाव

आइआइटी दिल्ली ग्रेटर नोएडा से आगरा तक की प्रति किमी जांच करेगी और फोटो समेत उन कारणों का पता लगाएगी, जिसकी वजह से हादसे होते हैं। ऑडिट का कार्य तीन माह में पूरा करना होगा। ऑडिट के बाद जो सुझाव दिए जाएंगे, उसे मार्च तक जेपी इंफ्राटेक को लागू करने होंगे।

धनराशि की कमी आ रही है आड़े

यमुना एक्सप्रेस वे के लिए धनराशि की कमी आड़े आ रही है। जेपी इंफ्राटेक का निदेशक बोर्ड निलंबित है। एनसीएलटी कामकाज देख रही है। इसलिए एक्सप्रेस-वे के लिए राशि जारी होने में लंबी प्रक्रिया का पालन करना पड़ रहा है।

मार्च तक देनी होगी रिपोर्ट

एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट मार्च तक सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी होगी। कोर्ट को यह बताना होगा कि आइआइटी दिल्ली ने एक्सप्रेस-वे की जांच के बाद क्या-क्या सुझाव दिए और उनमें से कितने लागू हुए और कितने नहीं।

सीआरआरआइ व राइट्स कर चुके हैं सुरक्षा जांच

इस एक्सप्रेस-वे पर हादसे रोकने को 2014-15 में प्राधिकरण ने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआइ) से जांच कराई थी। सीआरआरआइ ने इसमें एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालकों में जागरुकता बढ़ाने, साइनेज, अंडरपास एवं सड़क के जोड़ पर लगने वाले झटके का समाधान, वाहन चालकों के लिए लगाए गए संकेतकों को दुरुस्त कराने का सुझाव दिया था। सड़कों के लिए काम करने वाली निजी एजेंसी राइट्स भी यमुना एक्सप्रेस-वे का सर्वे कर सुरक्षा के उपाय अपनाने को सुझाव दे चुकी है।

क्या होता है सड़कों का सुरक्षा ऑडिट

सड़कों के सुरक्षा ऑडिट के लिए विशेषज्ञ एजेंसी अपने विशेषज्ञों के जरिए उसकी तकनीकी खामियों की जांच करती है। इसमें रोड के डिजाइन से लेकर उसकी सिग्नलिंग, उस पर मौसम का असर, सड़क निर्माण की गुणवत्ता, उस पर गाड़ियों की रफ्तार, गाड़ियों की संख्या, कलर कोडिंग आदि सभी पहलुओं की साइंटिफिक तरीके से जांच की जाती है। इसके आधार पर सड़क पर खतरे का आंकलन कर उसे सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए जाते हैं।

छह लेन से आठ लेन का होगा यमुना एक्सप्रेस-वे

जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने के बाद यमुना एक्सप्रेस-वे को छह लेन से आठ लेन करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय हवाई अड्डे की वजह से एक्सप्रेस-वे पर बढ़ने वाले वाहनों के दबाव को देखते हुए लिया गया है। ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस-वे पर साल दर साल वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेस-वे प्रतिदिन 38 से 40 हजार वाहन गुजरते हैं। मथुरा से आगरा के बीच प्रतिदिन 28 से तीस हजार वाहन गुजरते हैं।

Posted By: Amit Singh