नई दिल्ली, जेएनएन। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने पटाखों की बिक्री व आतिशबाजी पर सख्ती की है। इसके बावजूद दिवाली के दिन आतिशबाजी होने की आशंकाओं के मद्देनजर सफदरजंग, आरएमएल व लोकनायक अस्पताल में विशेष तैयारी की गई है। ताकि पटाखों से झुलसने वाले लोगों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। इन अस्पतालों के बर्न वार्ड में बेड आरक्षित कर दिए गए हैं और डॉक्टरों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई है।

सैकड़ों लोग झुलस जाते हैं
उल्लेखनीय है कि हर साल दिवाली में आतिशबाजी के दौरान सैकड़ों लोग झुलस जाते हैं। पिछले साल सफदरजंग, आरएमएल व लोकनायक अस्पताल में पटाखों से झुलसकर 110 मरीज बर्न वार्ड में इलाज के लिए पहुंचे थे। इसके अलावा एम्स के आरपी सेंटर में 68 मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे, जिनकी आंखें आतिशबाजी से गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं।

अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था
आतिशबाजी में आंखों की रोशनी भी जाने का खतरा रहता है। वर्ष 2016 में यहां के आठ अस्पतालों में आतिशबाजी में झुलसे 692 मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। यह आंकड़े आतिशबाजी के गंभीर परिणाम की तरफ इशारा कर रहे हैं। इसलिए अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था की गई है।

मौजूद रहेंगे विशेषज्ञ
आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी ने कहा कि बर्न वार्ड में एक ही जगह हर तरह के इलाज की व्यवस्था की गई है। वहां बर्न के अलावा आंखों के डॉक्टर व एनेस्थीसिया विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। ताकि मरीज के इलाज में देर न हो। जरूरत पड़ने पर मरीज की आंखों की सर्जरी भी तुरंत हो सकेगी।

लोग ग्रीन व ई-पटाखों को अपनाएं
डॉ तिवारी ने कहा कि कहा कि स्कूलों में बच्चों को इसके लिए जागरूक किया जाना चाहिए। सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र शर्मा ने कहा कि मंगलवार से लेकर चार दिन तक बर्न वार्ड में 24 घंटे अतिरिक्त डॉक्टर तैनात रहेंगे। एम्स प्रशासन के अनुसार आरपी सेंटर भी विशेष व्यवस्था की गई है। ताकि पटाखा जलाने के दौरान आंखों की चोट से पीड़ित होकर पहुंचने वालों का तुरंत इलाज हो सके।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस