नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। देश की राजधानी दिल्ली में डेंगू से मौत के भले ही नौ मामले ही रिपोर्ट हुए हैं लेकिन एम्स के डाक्टर कहते हैं कि प्रभावितों की संख्या इससे ज्यादा है। घरेलू उपचार, डाक्टर की सलाह के बगैर स्वयं इलाज व अस्पताल में देर से बेहद गंभीर अवस्था में पहुंचा खतरनाक साबित हो रहा है। कई मरीजों में किडनी व लिवर खराब होने की परेशानी भी देखी जा रही है। इससे मरीजों की हालत बिगड़ रही है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. आशुतोष विश्वास ने कहा कि यदि मरीज समय पर अस्पताल पहुंचे तो आसानी से इलाज किया जा सकता है। ऐसे में  घर में रहकर इलाज कराने वाले लोगों को कुछ लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है और दिन में तीन बार ब्लड प्रेशर (बीपी) जांच करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि डेंगू में ब्लड प्रेशर कम होने खतरे की घंटी है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देखा जा रहा है कि डेंगू के कई मरीज इलाज के लिए देर से अस्पताल में पहुंच रहे हैं। शुरुआती स्टेज में वे घर में रहकर घरेलू उपचार या खुद दवाएं ले रहे होते हैं। जब हालत ज्यादा खराब हो जाती है तब डाक्टर के पास पहुंचते हैं। कई मरीजों में चार से सात दिन में बीमारी गंभीर हो रही है। हाइपरटेंशन, मधुमेह, मोटापा व कोई अन्य संक्रमण हो तो डेंगू होने पर बीमारी जल्दी गंभीर हो जाती है।

तीन दिन में बुखार उतरने के बाद भी सतर्क रहने की दरकार

उन्होंने कहा कि ज्यादातर मरीजों में तीन से चार दिन में बुखार ठीक हो जाता है। तब मरीज को यह लगने लगता है कि बीमारी खत्म हो गई। लेकिन बुखार खत्म होने के बाद कई मरीज अचानक शॉक में चले जाते हैं। इसका कारण शरीर में पानी की मात्रा कम होने से ब्लड प्रेशर कम होना है। लिहाजा, तीन से चार दिन में बुखार ठीक होने के बाद भी यदि पेट दर्द, उल्टी, भूख न लगने की परेशान, नींद न लगे, ब्लड प्रेशर कम हो व शरीर के किसी हिस्से से हल्का रक्तस्त्राव हो तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। ऐसी स्थिति में सतर्क होना जरूरी है। लिहाजा दिन में सुबह, दोपहर व रात के वक्त ब्लड प्रेशर जांच करते रहना चाहिए। ब्लड प्रेशर कम होने से मरीज शॉक में चले जाते हैं। यदि जल्दी इसका इलाज नहीं हुआ तो इससे किडनी व लिवर खराब होने की आशंका रहती है। इसलिए बुखार होने पर शुरुआत से ही डाक्टर के संपर्क में रहना आवश्यक है। 

Edited By: Jp Yadav