नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली हाईकोर्ट ने मानहानि के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वकील राम जेठमलानी द्वारा जिरह के दौरान केंद्रीय मंत्री जेटली के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को 'अपमानजनक' करार दिया।

बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस मनमोहन ने कहा कि अगर ऐसे आरोप केजरीवाल के निर्देश पर लगाए गए हैं तो उन्हें पहले कठघरे में आना चाहिए और जेटली से जिरह जारी रखने से पहले अपने आरोप लगाने चाहिए। वरना जिरह जारी रखने का कोई मतलब नहीं है।

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जेटली के वकील राजीव नायर और संदीप सेठी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि वह केजरीवाल की ओर से इस बात का स्पष्टीकरण चाहते हैं कि टिप्पणियां उनके निर्देश पर की गई थीं या जेठमलानी ने अपनी ओर से ही की थीं।

राजीव नायर ने कहा कि यदि केजरीवाल ने वरिष्ठ वकील को ये टिप्पणियां करने के निर्देश दिए थे तो वे अतिरिक्त दस करो़ड़ रुपये का दावा करेंगे। दूसरी तरफ यदि जेठमलानी ने अपनी ओर से टिप्पणियां की हैं तो यह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का उल्लंघन है।

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कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार से जिरह की इजाजत नहीं दी जा सकती और इस संबंध में कुछ किया जाना चाहिए। जेटली के वकीलों से कहा कि जेठमलानी की टिप्पणियों को लेकर एक आवेदन दाखिल करें।

जस्टिस मनमोहन ने कहा कि जब ऐसे अपमानजनक टिप्पणियां की जाएंगी तो क्या किया जा सकता है? यह अप्रिय है। जिरह कानून के हिसाब से ही किया जाना चाहिए।

यदि दुष्कर्म मामले में ऐसी जिरह हुई तो...

कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरीके से दुष्कर्म के मामलों में जिरह की गई तो यह एक बार फिर से पीड़िता के साथ दुष्कर्म किए जाने सरीखा होगा और वह भी कोर्ट में।

जेठमलानी ने विवादित टिप्पणियां रजिस्ट्रार दीपाली शर्मा के समक्ष उस समय की थीं जब जेटली से केजरीवाल और आप के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ उनके द्वारा दायर 10 करो़ड़ रुपये के दीवानी मानहानि मामले में जिरह की जा रही थी।

इन नेताओं ने जेटली पर साल 2000 से 2013 तक डीडीसीए का अध्यक्ष रहने के दौरान वित्तीय अनियमितताएं करने का आरोप लगाया था। केजरीवाल के अलावा आप के पांच अन्य नेता राघव चड़़्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक बाजपेयी इसी मुद्दे पर जेटली द्वारा दायर फौजदारी मानहानि के मुकदमे का भी सामना कर रहे हैं।

यह मामला जस्टिस मनमोहन के समक्ष तब उठा जब राघव चड़़्ढा द्वारा जेटली की याचिका के जवाब में दायर अपने लिखित जवाब में संशोधन के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई चल रही थी।

सुनवाई के दौरान जिस तरीके से जिरह की जा रही थी उस पर जस्टिस नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति जिसने मानहानि का मामला दायर किया है उसकी इस तरीके से और मानहानि नहीं की जा सकती है।
संशोधित आवेदन को 26 मई को अदालत की एक अन्य पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

Posted By: JP Yadav

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