नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi Lockdown WARNING! दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों ने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बढ़ रहे कोरोना के मरीजों की संख्या को लेकर चिंतित है। हर तरह से बचाव के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने पहले ही ये बता दिया है कि किस तरह के हालात पैदा होने पर लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है। साथ ही सीएम ने ये भी कहा कि मरीजों को ध्यान में रखते हुए बेड़ों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।

उधर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने दिल्ली के लोगों से अपील करते हुए कहा कि बहुत जरूरी हो, तभी घर से बाहर निकलें और कोरोना को फैलने से रोकने में सहयोग करें। उन्होंने बताया कि हमने पिछले सप्ताह 5 हजार बेड बढ़ाए हैं और अस्पतालों में अभी 50 फीसद बेड उपलब्ध हैं। हम अभी और बेड बढ़ा रहे हैं।

दिल्ली सरकार के कोविड केयर सेंटर के 5525 बेड में से केवल 190 बेड भरे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जरूरत के अनुसार, दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर अस्थाई कोविड केयर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। हमने केंद्र सरकार से भी अपने अस्पतालों में कोविड बेड बढ़ाने का अनुरोध किया है।

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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कोरोना के संबंध में बातचीत के दौरान कहा कि दिल्ली में कल 10774 पॉजिटिव केस आए थे और सकारात्मकता दर 9.43 फीसद थी। रविवार को दिल्ली में 1,14,288 टेस्ट किए गए थे। कोरोना की जो रिपोर्ट जारी की गई, उसके अनुसार, दिल्ली समेत पूरे देश में करीब 1.70 लाख से भी ज्यादा कोरोना के केस आए हैं। दिल्ली में भी कोराना नए स्तर पर पहुंच रहा है और पूरे देश में भी यही हालत है।

उन्होंने सभी लोगों से अपील है कि घर से तभी निकलें, जब बहुत जरूरी काम हो और कोरोना को फैलने से रोकने में मदद करें। घर से जब भी बाहर निकलें, तब मास्क अवश्य लगाकर निकलें, बिना मास्क लगाए घर से बाहर न निकलें।

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उन्होंने कहा कि अस्पताल में दो ही चीजें हैं। एक आईसीयू है और एक वार्ड है। एक साल पहले जब कोविड-19 आया था, तब वेंटिलेटर का मुद्दा ज्यादा उठा था। अभी एचएफएनओ, बाइपअप और हाई फ्लो आक्सीन पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि हर एक मरीज को वेंटीलेटर की जरूरत नहीं होती है। सिर्फ दो से तीन फीसद लोगों को ही वेंटिलेटर की जरूरत होती है।

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होता यह है कि अगर वेंटिलेटर बेड पर कोई मरीज है और उसे वेंटिलेटर की जरूरत नहीं भी है, तब भी उसे वेंटिलेटर बेड में दर्ज किया जाता है। लेकिन वास्तव में वेंटिलेटर बेड पर बहुत ही कम मरीज हैं। मसलन, बुराड़ी अस्पताल में 30 मरीज हैं, जो वेंटिलेटर बेड के उपर हैं, लेकिन वास्तविकता में वेंटीलेटर पर एक भी मरीज नहीं हैं। उसी तरह, एलएनजेपी अस्पताल के अंदर वेंटिलेटर बेड पर 60 से 70 मरीज हैं, लेकिन उसमें से वास्तव में वेंटिलेटर के ऊपर दो या तीन मरीज ही हैं।

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