नई दिल्ली (बिजेंद्र बंसल)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरियाणा में भूजल प्रदूषित कर रही औद्योगिक इकाइयों को बंद कराने का फैसला दिया है। फरीदाबाद के गांव झाड़सेंतली रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन व समाजसेवी वरुण श्योकंद की याचिका पर फैसला सुनाते हुए एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों का सर्वे कर उन पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना भी करने का आदेश दिया है।

याचिका में रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने शिकायत की थी कि फरीदाबाद के औद्योगिक सेक्टर-58 की डाइंग और इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट केमिकलयुक्त पानी शोधित किए बिना खुले में छोड़ देती हैं। इससे भूजल प्रदूषित होता है। प्रदूषित भूजल से गांव झाड़सेंतली में कई लोग कैंसर से भी पीड़ित हैं।

एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने पिछले दिनों प्रदूषण फैला रही यूनिट का सर्वे भी किया था। इसके बाद भी जब औद्योगिक इकाइयों ने सुधार नहीं किया तो एनजीटी के जस्टिस स्वतंत्र कुमार, जस्टिस जवाद रहीम और जस्टिस बीएस सजवान की पीठ ने यह कड़ा फैसला दिया।

रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान चरण डागर ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अब अपनी कार्रवाई करनी है। एसोसिएशन मौके पर प्रदूषित इकाइयों के सर्वे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सहयोग करेगी।

By JP Yadav