नई दिल्ली [शुजाउद्दीन]। इस बार यमुनापार के लोग ग्रीन पटाखों के साथ दीपावली मनाएंगे। गत वर्ष की तरह यहां के लोगों को पटाखे लेने के लिए दूसरे राज्यों के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। हांलाकि पूरे यमुनापार में केवल विश्वास नगर में ही ग्रीन पटाखे की दुकान अभी तक खुल सकी है। पिछले वर्ष सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश जारी कर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस वर्ष पहली बार ग्रीन पटाखे बाजार में आए हैं।

दीपावली में नौ दिन शेष रह गए हैं, लेकिन यमुनापार में शाहदरा जिले में केवल एक ही दुकानदार को लाइसेंस मिला है। उत्तरी पूर्वी और पूर्वी जिले में दुकानों का खाता ही नहीं खुला। पटाखा दुकानदार अनिल अग्रवाल ने बताया कि ग्रीन पटाखों में वह अनार और फुलझड़ी ही बेच रहे हैं। एक पैकेट में पांच अनार है और कीमत 150 से लेकर 350 तक है। फुलझड़ी के पैकेट 100 से लेकर 250 तक के उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी के साथ पटाखे बेचे जा रहे हैं, इन पटाखों से प्रदूषण काफी कम होगा।

पटाखों के डिब्बों पर है क्यूआर कोड

कोर्ट के आदेश के अनुसार, ग्रीन पटाखों के डिब्बों पर क्यूआर कोड दिया गया है। इस कोड को स्कैन करके लोग यह पता लगा सकते है कि पटाखा किस कंपनी का है और इसे किस तारीख को बनाया गया है। इस कोड के जरिए लोग यह भी पता लगा सकते है कि पटाखा वाकई में ग्रीन पटाखा है भी या नहीं। दुकानदार ग्रीन पटाखों की आड़ में प्रदूषण वाले पटाखे नहीं बेच पाएंगे। अगर किसी दुकान में बिना क्यूआर कोड वाला पटाखे का डिब्बा पाया जाता है तो पुलिस दुकानदार का लाइसेंस हाथों हाथ रद कर सकती है, साथ ही दुकानदार कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के मामले में जेल भी जा सकता है।

पूर्वी जिले में सभी आदेवन रद

पटाखों की बिक्री के लिए दिल्ली पुलिस की अनुमति चाहिए होती है। दिल्ली में 30 सितंबर 2019 तक 97 लोगों ने पटाखे के लाइसेंस के लिए पुलिस में आवेदन किए थे, पूर्वी जिले से 21 लोगों ने आवेदन किया था। दिल्ली में सबसे ज्यादा आवेदन पूर्वी जिले से हुए थे, लेकिन पुलिस ने गत छह अक्टूबर को 21 के 21 आवेदनों को रद कर दिया।

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Posted By: Mangal Yadav

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