नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। निजी स्कूलों से बेहतर शिक्षा स्तर बनाने की कड़ी में दक्षिणी निगम ने सौ से अधिक अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने का फैसला लिया है। जल्द ही सौ स्कूल अग्रेंजी माध्यम में तब्दील हो जाएंगे। अभिभावकों की मर्जी से विद्यार्थियों को इन स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके साथ ही 12 नए स्कूल बनकर तैयार हुए हैं उनमें से भी इसमें शुरू किया जाएगा।

दक्षिणी निगम ने इस संबंध फैसला लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम मुख्यालय में प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए दक्षिणी निगम के महापौर मुकेश सुर्यान ने बताया कि जिस प्रकार तीनों नगर निगम के स्कूलों में सवा लाख से अधिक बच्चों ने बीते वर्षो के मुकाबले दाखिला लिया है, इससे साबित होता है कि निगम की शिक्षा व्यवस्था से अभिभावक संतुष्ट हैं।

हम अपने कर्मचारियों को बधाई देना चाहते हैं कि जो हम फैसले लेते हैं उन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जाता है। इसकी वजह से निगम के स्कूलों को लेकर लोगों के दिमाग में छवि बदली है। इस वर्ष जो दाखिले हुए हैं उसमें बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी है जो प्राइवेट स्कूल से नाम कटवाकर निगम के स्कूलों में आए हैं। इसको देखते हुए अब हमने पूरी तरह अग्रेजी माध्यम स्कूल शुरू करने का फैसला लिया है। हर वार्ड में एक स्कूल पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम का होगा। यानी 104 स्कूल अंग्रेजी माध्यम के शुरू होने जा रहे हैं। कक्षाओं में लगाए गए हैं स्मार्ट बोर्डमहापौर ने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा शिक्षा का बजट काटे जाने के बाद निगम ने 12 स्कूलों की इमारतें बना ली है। जिनका जल्द ही उद्घाटन होगा।

शिक्षा समिति की चेयरपर्सन नीतिका शर्मा ने कहा कि सभी स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगा दिए गए हैं व इमारतों को सीसीटीवी युक्त कर दिया गया है। इतना ही मिड-डे मील पौष्टिक व स्वच्छ मिले इसके लिए चार अपनी रसोई निगम ने निर्माण की हैं। 468 स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बनाए गए है। पांच हजार बच्चों को टैब देने का भी फैसला लिया गया है। जबकि 200 स्कूलों में निगम विज्ञान क्लब बना चुका है।दिल्ली सरकार करती है झूठे शिक्षा माडल का दावा महापौर ने दिल्ली सरकार पर शिक्षा माडल का झूठा दावा करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा की क्रांति का ढोंग रचा जा रहा है, सच्चाई यह है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षा की स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के 745 विद्यालयों में प्रधानाचार्य नही हैं व 418 में उपप्रधानाचार्य नही हैं। विद्यालयों में 15 हजार टीजीटी अध्यापकों के पद खाली हैं व 700 स्कूलों में विज्ञान की ही पढ़ाई नहीं होती है। महापौर के आरोपों पर दिल्ली सरकार से पक्ष मांगा गया लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari