नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह ऐसे घर खरीदारों की शिकायतों का समाधान करने के लिए ‘एक समान प्रस्ताव’ पर काम कर रहा है, जो अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई रियल एस्टेट कंपनियों को देने के बाद फंस जाते हैं। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अगर जेपी इंफ्राटेक मामले में 21,000 से अधिक घर खरीदारों की शिकायतों का समाधान नहीं किया गया, तो वह उनके हितों की रक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों से राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय टिब्यूनल (एनसीएलएटी) के समक्ष निर्णय पर पहुंचने के लिए आम सहमति बनाने का प्रयास करने को कहा। केंद्र ने कोर्ट से कहा कि एनसीएलएटी 17 जुलाई को मामले पर सुनवाई करेगी।

इसके बाद जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने मामले की सुनवाई 18 जुलाई तक टाल दी। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कोर्ट को सूचित किया कि एनसीएलएटी के समक्ष 17 जुलाई को सुनवाई होने वाली है और इसलिए इसके नतीजे का इंतजार करना बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र एक समान प्रस्ताव पर काम कर रहा है ताकि पीड़ित घर खरीदारों की विभिन्न शिकायतों को दूर किया जा सके और इसे 23 जुलाई तक लंबित यूनिटेक घर खरीदारों के मामले में शीर्ष कोर्ट के निर्देशानुसार प्रस्तुत किया जाएगा।

कोर्ट ने कहा- जेपी मामले में शिकायतें दूर हों नहीं तो करेंगे शक्तियों का प्रयोग

घर खरीदारों की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें आशंका है कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआइएल) को लिक्विडेशन (परिसमापन) के लिए भेजा जा सकता है, जिससे उनके हित प्रभावित हो सकते हैं। इस पर, पीठ ने कहा कि भले ही एनसीएलएटी कंपनी को परिसमापन के लिए भेजती है, लेकिन शीर्ष कोर्ट के पास घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पर्याप्त पूर्ण अधिकार हैं।

वकील ने यूनिटेक घर खरीदार मामले का उल्लेख किया जहां सरकार ने हाल ही में संकेत दिया कि वह रुकी हुई परियोजनाओं का अधिग्रहण कर सकती है और कहा कि जेपी मामले में भी घर खरीदारों को इसी तरह की राहत दी जा सकती है। इस पर, पीठ ने कहा कि पक्षकारों द्वारा किया गया कोई भी नया संशोधित या ताजा प्रस्ताव एनसीएलएटी के समक्ष आ सकता है।

शीर्ष कोर्ट ने नौ जुलाई को केंद्र से लाखों ऐसे घर खरीदारों की समस्याओं को हल करने के लिए ‘एक समान प्रस्ताव’ पेश करने को कहा था, जो बिल्डरों को भारी रकम चुकाने के बावजूद अब तक अपने फ्लैटों का कब्जा हासिल नहीं कर सके हैं। शीर्ष कोर्ट जेआइएल से संबंधित एक घर खरीदार के मामले पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा लाखों फ्लैट खरीदारों से जुड़ा हुआ है और केंद्र को इसका समाधान करने के लिए एक ठोस प्रस्ताव देना चाहिए।

यहां पर बता दें कि निवेशकों की सबसे बुरी स्थिति नोएडा और ग्रेटर नोएडा में है। यहां पर लाखों की संख्या में निवेशक अपना आशियाना पाने का इंतजार कर रहे हैं। आलम यह है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ही अपने प्रोजेक्ट का काम पूरा किए बिना करीब 25 फीसदी बिल्डर गायब हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और गाजियाबाद को भी इसमें जोड़ दें तो यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा, क्योंकि यहां पर भी हालात नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे ही हैं। 

नोएडा-ग्रेटर नोएडा के करीब 75 हजार फ्लैट खरीदारों की नजर कोर्ट पर है। आम्रपाली, जेपी और यूनिटेक के यह खरीदार कोर्ट पर नजर रखे हुए हैं। ऐसे खरीदारों के मामले में रेरा, प्राधिकरण और प्रशासन भी नहीं बात करता है। खरीदारों का कहना है कि अब कोर्ट से ही कुछ राहत संभव है। इनमें से भी कई मामलों में फंड डायवर्ट करने का मामला है। यहां अधिकांश प्रोजेक्ट अधूरे हैं।

नेफोवा का कहना है कि करीब 50 हजार फ्लैट खरीदार बुरी तरह से फंस गए हैं। ऐसे करीब 25 फीसद बिल्डर हैं, जिन्होंने काम पूरा नहीं किया। खास बात यह कि इनमें से कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जहां गड्ढा तक नहीं खुदा है। ऐसे हजारों खरीदार उनके चंगुल में फंसे हुए हैं।

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Posted By: JP Yadav