नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। तकरीबन एक दशक से फाइलों में ही बन रही दिल्ली की तीसरी रिंग रोड के निर्माण का प्रस्ताव अब स्वीकृति के लिए सार्वजनिक निवेश बोर्ड (पीआइबी) में जाएगा। यहां से हरी झंडी मिलने पर जल्द ही इसके निर्माण का टेंडर जारी होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के हस्तक्षेप से इसके निर्माण में फंसा बजट का पेच भी निकलता नजर आ रहा है।

गौरतलब है कि अर्बन एक्सटेंशन रोड नंबर दो नाम से इस तीसरी रिंग रोड का प्लान दशक भर से तैयार है। मास्टर प्लान 2021 में भी इसका उल्लेख है। इसे बनाने का मकसद यही है कि दिल्ली के बाहरी इलाकों से होते हुए ही वाहन पश्चिमी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली तक निकल जाएं। इस रोड का निर्माण होने के बाद दिल्ली के बाहरी हिस्सों में मिलने वाले चारों नेशनल हाईवे भी इससे जुड़ जाएंगे।

अनधिकृत कब्जे जैसी अड़चनों से अटकी थी फाइल

दरअसल, पहले यह रोड प्रस्तावित जमीन पर अनधिकृत कब्जे जैसी अड़चनों से कागजों में लटकी रही। डीडीए ने अतिक्रमण-अवैध कब्जे हटाने और भूमि अधिग्रहण का काम पूरा किया तो बजट का पेच फंस गया। एनएचएआइ ने टेंडर निकालने से पूर्व डीडीए को इसके निर्माण पर आने वाला करीब पांच हजार करोड़ रुपये का खर्च वहन करने को कहा तो डीडीए एनएचएआइ को 300 एकड़ जमीन ऑफर कर दी। इसे बेचकर एनएचएआइ को रिंग रोड की लागत जुटाने के लिए कहा गया। लेकिन एनएचएआइ ने जब इस जमीन का मूल्यांकन कराया तो लागत में कुछ कमी रह गई। ऐसे में उसने डीडीए से 50 एकड़ जमीन और मांगी।

बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप पर डीडीए नरेला और रोहिणी में यह अतिरिक्त जमीन देने को भी तैयार हो गया है। एनएचएआइ को भी उम्मीद है कि अब 350 एकड़ जमीन बेचकर उसे इस रिंग रोड की पूरी निर्माण लागत मिल जाएगी। इसी आधार पर पीआइबी में भेजने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 के लिए धनराशि जुटाने को एनएचएआइ ने डीडीए से मांगी और जमीन

डीडीए उपाध्यक्ष तरुण कपूर ने बताया कि पैसे के बदले पहले एनएचएआइ को 300 एकड़ जमीन ऑफर की गई थी, अब 50 एकड़ जमीन और देने का प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस रिंग रोड के बजट की समस्या सुलझ जाएगी। पीआइबी से मंजूरी मिलने के बाद इस प्रस्ताव पर काम आगे बढ़ने की संभावना है।

ये होंगे रूट

पहले चरण में यह रोड एनएच-एक दिल्ली-अंबाला राजमार्ग पर नरेला से शुरू होगी जो रंगपुरी शिव मूर्ति के पास एनएच- 8 यानी दिल्ली जयपुर राजमार्ग से मिलेगी। आगे यह एनएच-2 यानी दिल्ली-मथुरा राजमार्ग भी जुड़ जाएगा। साथ ही बाहरी, पश्चिमी, दक्षिणी दिल्ली में डीडीए की प्रस्तावित लैंडपूलिंग आवासीय योजना के लिए भी एक नया मार्ग मिल जाएगा।

दो फेज में बनेगी रोड

फेज-1 के तहत 49 किलोमीटर रोड का निर्माण होगा। यह पानीपत से दिल्ली की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे एक से होकर बाहरी दिल्ली से होते हुए एनएच 8 (दिल्ली- गुरुग्राम) होते हुए नेल्सन मंडेला मार्ग तक बनाई जाएगी। दूसरे चरण में इसे एनएच 2 यानी बदरपुर से जुड़ने वाले नेशनल हाईवे से जोड़ा जाएगा।

Posted By: Mangal Yadav

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