नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। रोहिणी कोर्ट रूम के अंदर कुख्यात जितेंद्र मान उर्फ गोगी की हत्या की साजिश में शामिल कुख्यात नवीन हुडडा उर्फ विक्की उर्फ भांजा को स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया है। इसपर दिल्ली पुलिस से 50 हजार का इनाम था। गोगी की हत्या के दौरान नवीन का नाम सामने आ गया था। पुलिस का कहना है कि वह 25 से अधिक हत्या की वारदातों को अंजाम दे चुका है। इसके खिलाफ मकोका, डकैती, लूटपाट, फिरौती के लिए अपहरण, पुलिसकर्मियों से हथियार लूटने, हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी वसूलने व आर्म्स एक्ट के दिल्ली-एनसीआर के थानों में 40 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

डीसीपी संजीव कुमार यादव के मुताबिक एसीपी संजय दत्त, इंस्पेक्टर कैलाश सिंह बिष्ट व अनुज त्यागी की टीम ने नवीन को 26 जनवरी को मुजफ्फर नगर-मेरठ टोल से दबोचा। वह हरि सिंह कालोनी, सुनारिया चौक, रोहतक, हरियाणा का रहने वाला है और जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवानिया का सबसे खास शूटर माना जाता है।

सेल सूचना मिली थी कि नीरज बवानिया गिरोह का गैंगस्टर और शूटर नवीन मुजफ्फर नगर-मेरठ रोड पर होंडा सिटी कार से किसी से मिलने आने वाला है। पुलिस टीम ने जब उसे टोल प्लाजा के पास रुकने का इशारा किया तब उसने यू-टर्न लेने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने वाहनाें से रास्ता रोक दिया। कोई रास्ता न मिलने पर जब वह कार से उतरकर भागने लगा तभी उसे काबू में कर लिया गया।

पुलिस के मुताबिक नवीन 2011 में नीरज बवानिया गिरोह में शामिल हुआ था। उसी साल उसने नीरज व गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर विरोधी गैंगस्टर मंडोठी गांव निवासी करतार पर अंधाधुन गोलियां चलाईं थी। हमले में वह बच गया था। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर हरियाणा पुलिस को सौंप दिया था। 2012 में जेल से छूटने के बाद वह नीरज बवानिया का करीबी और भरोसेमंद बन गया था। दिल्ली, यूपी और हरियाणा में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए उसने नीतू दाबोदिया गिरोह खत्म करने की ठान लिया था। सेल द्वारा वसंतकुंज में नीतू दाबोदिया व उसके साथियों को मुठभेड़ में मार गिराने पर नीतू का सहयोगी प्रदीप दहिया गिरोह का सरगना बन गया था। 2014 में उक्त दोनों गिरोहों के बीच गोलीबारी में नवीन और उसके साथी नीरज बवानिया, मोनू, अशोक, रघु, पंकज और अरविंद शामिल थे। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गिरोह के सरगना प्रदीप दहिया और अनिल उर्फ लीला की गोली मारकर हत्या कर दी थी जबकि प्रदीप का साथी अंशुल गोली लगने से घायल हो गया था। उक्त घटना के दो माह बाद नवीन ने दिनेश उर्फ तापा व दीपक के साथ मिलकर रोहतक के शिवाजी कालोनी में कृष्ण पर गोलियां चलाईं थी, वह भी बच गया था।

नीरज, बागपत के टिकरी निवासी सुनील राठी का करीबी दोस्त है, जो एक हत्या के एक मामले में उत्तराखंड जेल में बंद है। सुनील राठी के अनुरोध पर नीरज बवानिया ने अमित भूरा को उत्तराखंड पुलिस की हिरासत से छुड़ाने का वादा किया था। 15 दिसंबर 2014 को अमित भूरा के बागपत से देहरादून पुलिस की हिरासत से भगाने की घटना से पहले नवीन, सचिन खोकर, दिनेश उर्फ तापा, रवि और लड्डू, अमित को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के दो प्रयास कर चुका था लेकिन सफल नहीं पाया था।

14 दिसंबर 2014 की शाम नीरज बवानिया ने अपने दिल्ली स्थित कार्यालय नवीन व दिनेश सहित गिरोह के सदस्यों के साथ बैठक कर अमित को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए योजना बनाई थी। कमरुद्दीन नगर में कांग्रेस के तत्कालीन विधायक रामबीर शौकीन भी बैठक में था। 15 दिसंबर 2014 को नवीन व दिनेश सात अन्य बदमाशों के साथ स्कॉर्पियो से टटेरी मंडी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। योजनानुसार दिनेश और रवि उसी ऑटो रिक्शा में सवार हुए थे जिसमें उत्तराखंड पुलिस अमित भूरा को बागपत कोर्ट ले जा रही थी। जैसे ही स्कार्पियो ने ओवरटेक कर उक्त आटो को टक्कर मारी दिनेश व रवि ने पुलिसकर्मियों पर मिर्च पाउडर फेंक दिया। उधर नवीन व अन्य ने हवा में फायरिंग शुरू कर दी। उसी दौरान बदमाशों ने गैंगस्टर अमित भूरा को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के अलावा उनके दो एके-47 और एक एसएलआर राइफल लूट लिया था।

Edited By: Mangal Yadav