नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। अवैध तरीके से नौ साल के दरियाई घोड़े को अपने कब्जे में रखने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एसियाड सर्कस के मालिक रियाजुद्​दीन खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। एसियाड सर्कर का लाइसेंस वर्ष 2017 में निरस्त कर दिया था। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह की पीठ ने निर्देश दिया कि 15 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर एसियाड सर्कस के मालिक को पेश किया जाए। इसके साथ ही सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूयलिटी टू एनिमल (एसपीसीए) को निर्देश दिया कि तत्काल दरियाई घोड़ा को अपने कब्जे में लें और इसे चिड़ियाघर में पहुंचाएं।

पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल (पेटा) द्वारा वर्ष 2018 में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड पर लिया कि कई निर्देश जारी होने के बावजूद भी रियाजुद्​दीन खान ने मामले में कोई फैसला नहीं किया और न ही दरियाई घोड़े की लोकेशन ही बताई। पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि कब्जे में लेने जाने वाली एसपीसीए की टीम को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और एसपीसीए को निर्देश दिया कि कार्रवाई पूरी होने के बाद अपनी रिपोर्ट पेश करें।

पीठ ने कहा कि दरियाई घोड़े को कब्जे में लेने के बाद उसे दिल्ली के चिड़ियाघर में रखा जाए। पीठ ने इस दौरान प्राधिकारियों को दरियाई घोड़े की अगली सुनवाई तक देखभाल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 15 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एसियाड सर्कस ने फरवरी 2015 में पटना स्थित संजय गांधी बायलॉजिकल पार्क से दरियाई घोड़ा आयात किया था और उसे प्रशिक्षित करके अवैध तरीके से सर्कस में प्रदर्शित किया जा रहा है।

पेटा की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता अमन हिंगोरानी ने कहा कि सर्कस बंद हो चुका है और प्रधंबन अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सर्कस द्वारा दरियाई घोड़े को लोगों के मनोरंजन के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और उसे उसके परिवार से दूर किया गया है।

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