नई दिल्ली, विनीत त्रिपाठी। ऐतिहासिक कुतुब मीनार के आसपास हो रहे अवैध व अनधिकृत निर्माण को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम के आयुक्त से पूछा कि आखिर आपके अधीनस्थ अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने आयुक्त को निर्देश दिया कि वे अपने अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करें और उन्हें बताएं कि कौन क्या करेगा। साथ ही अनधिकृत रूप से हुए निर्माण के पूरे विवरण के साथ एक स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

पीठ ने 20 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर दक्षिण जोन के उपायुक्त को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया। पीठ ने यह तल्ख टिप्पणी व आदेश तब दिए जब याचिकाकर्ता रिंकू कौशिक ने पीठ को सूचित किया कि अदालत में पेश की गई रिपोर्ट ठीक नहीं है क्योंकि मौके पर दिखावे के लिए ही तोड़फोड़ की गई है। रिंकू की जानकारी पर पीठ ने निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित करें कि कुतुब मीनार के आसपास बनाए गए भवन जोकि अब भी खाली हैं उनमें कोई भी व्यक्ति दाखिल न हो सके।

याचिकाकर्ता रिंकू कौशिक ने वर्ष 2018 में कुतुब मीनार के आसपास हो रहे अवैध निर्माण को लेकर याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुतुब मीनार से सटी सरकारी भूमि पर बड़े स्तर पर अवैध और अनधिकृत कालोनी विकसित की जा रही है। इतना ही नहीं वहां छह मंजिला और उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के कई निर्देशों के बावजूद नगर निगम के अधिकारियों ने अवैध व अनधिकृत भवनों के निर्माण को पूरा करने की अनुमति दी है। याचिका में कुतुबमीनार के पास एक इमारत के निर्माण की अनुमति देने में बिल्डरों, राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों, नगर निगम के अधिकारियों और अन्य स्थानीय निकायों के बीच गठजोड़ और फ्लैटों के बेचने का भी आरोप लगाया गया है।

Edited By: Prateek Kumar