नई दिल्ली [राज्य ब्यूरो]। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिस डोर स्टेप डिलीवरी योजना को लेकर वाहवाही लूटने का प्रयास कर रहे हैं। यह योजना पहले ही दिन फेल हो गई। योजना के लिए हेल्पलाइन का जो 1076 फोन नंबर जारी किया गया, वह फोन नंबर मिल ही नहीं रहा था। देर शाम तक यही स्थिति थी। लोग कहते हुए पाए गए कि सरकार की घोषणा फर्जी है। वहीं पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने भी योजना की सफलता पर आशंका जाहिर की है।

मजबूत व्यवस्था खड़ी करनी होगी
पूर्व मुख्य सचिव ने साफ कहा है कि इस तरह की योजनाओं के लिए मजबूत व्यवस्था खड़ी करनी होगी। उन्होंने कहा है कि योजना को शुरू करने के लिए केवल वाहवाही वाली मंशा नहीं होनी चाहिए। हर माह योजना की समीक्षा कर यह पता लगाना चाहिए कि यह अपने उद्देश्य में सफल हो रही है कि नहीं। साथ ही सेवा में परेशानी होने पर इसके निवारण के लिए एक तंत्र भी विकसित किया जाना चाहिए।

40 की जगह 80 ऑपरेटर काम करेंगे
उधर फोन नहीं मिलने पर दिल्ली सरकार ने सफाई दी है कि अत्यधिक कॉल के चलते बहुत से लोगों के फोन नहीं मिले। इसके मद्देनजर मंगलवार से 40 की जगह 80 ऑपरेटर काम करेंगे। टेलीफोन लाइनों की संख्या को भी 50 से बढ़ाकर 120 किया जाएगा। लोगों के फोन भले ही न मिले हों मगर सरकार का दावा है कि शुभारंभ से शाम छह बजे तक 2,728 कॉल आई। इनमें से 1,286 कॉल का जवाब दिया गया। बाकी कॉल वेटिंग लाइन पर थीं और उनको कॉल बैक किया जा रहा है।

जिज्ञासा के लिए भी कई कॉल की गईं
विभिन्न सेवाओं के लिए कॉल करने वालों में से शाम 6 बजे तक 369 लोगों की मुलाकात निर्धारित की गई है। इनमें से 7 लोगों के घरों से जरूरी दस्तावेज ले लिए भी गए हैं। शाम 6 बजे तक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की 21,000 से ज्यादा बार कोशिशें हुई, लेकिन हैवी ट्रैफिक की वजह से ये कनेक्ट नहीं हो पाईं। उन्हें अब कॉल सेंटर की तरफ से कॉल किया जाएगा। वहीं सरकार का कहना है कि पहले दिन की तुलना में कॉल की संख्या में कमी आने का अनुमान है, क्योंकि पहले दिन महज जिज्ञासा के लिए भी कई कॉल की गईं।