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नई दिल्ली, जेएनएन। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे भीषण आग लग गई। साढ़े सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 12 बजे इस पर काबू पाया जा सका। टीचिंग ब्लॉक की दूसरी मंजिल से शुरू हुई आग कुछ ही देर में पहली, तीसरी, चौथी व पांचवीं मंजिल तक पहुंच गई। डॉक्टरों और अन्य स्टाफ समेत करीब 50 लोगों ने बाहर भागकर जान बचाई। इसके बराबर में इमरजेंसी लैब वाली इमारत में धुआं फैलने के कारण वहां भर्ती करीब 55 मरीजों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। करोड़ों के नुकसान का अनुमान है। इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दी गई हैं। बारिश के कारण बचाव कार्य में बाधा आई, लेकिन इससे आग नहीं फैलने का लाभ भी मिला।

घटना की विकरालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एम्स ने दो बार बयान जारी कर कहा कि किसी मरीज को नुकसान नहीं पहुंचा है। हेल्पलाइन नंबर (011-26593308) पर लोग जानकारी ले सकते हैं। घटना कैसे हुई, इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई बताने को तैयार नहीं था, लेकिन एक्स-रे विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि एक्स-रे मशीन में धमाके से आग लगी और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग में फैल गई।

एम्स परिसर में मुख्य अस्पताल के बराबर में टीचिंग ब्लॉक की पांच मंजिला इमारत है, जिसमें लैब मेडिसिन और इमरजेंसी लैब डिपार्टमेंट के साथ ही कई प्रोफेसरों के ऑफिस बने हुए हैं। सैंपल कलेक्ट करने के लिए डीप-फ्रीजर भी रखे हुए हैं। यहीं एक्स-रे भी होता है। शाम करीब साढ़े चार बजे दूसरी मंजिल पर माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट में आग लग गई। सुरक्षाकर्मियों ने फायर फाइटिंग उपकरणों से काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग और तेज हो गई। करीब पौने पांच बजे कंट्रोल रूम को सूचना दी गई।

चल रहा था ऑपरेशन

टीचिंग ब्लॉक के बराबर वाली बि¨ल्डग में इमरजेंसी लैब है। इसमें हड्डियों के मरीजों का ऑपरेशन होता है। आग लगने के वक्त भी एक मरीज का ऑपरेशन चल रहा था। बराबर वाली इमारत से धुआं इसमें भी फैलने लगा तो उक्त मरीज का जल्द ऑपरेशन पूरा किया गया। उसके समेत अन्य सात-आठ ऐसे मरीज जिनका एक-दो दिन पहले ही ऑपरेशन हुआ था, उन्हें समेत कुल 55 मरीजों को दूसरी इमारत में शिफ्ट किया गया। ज्यादातर मरीजों को ओपीडी काउंटर की टिन शेड के नीचे शिफ्ट किया गया। कई ऐसे मरीज भी देखे गए जिनको खून चढ़ रहा था।

रेजिडेंट डॉक्टरों व नर्सो ने भी लोगों ने बचाया

टीचिंग ब्लॉक में आग लगने पर लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। इस दौरान रेडिजेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के सदस्यों और नर्सो ने लोगों की मदद की और उन्हें आग से निकाला। इन्हें सभी रास्तों का पता होने का फायदा मिला।

काटी गई बिजली

प्रशासन ने एहतियातन टीचिंग ब्लॉक, इमरजेंसी ब्लॉक व जनरल वार्ड की बिजली काटी दी गई। यहां के मरीजों को आरपी सेंटर, कार्डियक न्यूरो सेंटर सहित एम्स के अन्य सेंटरों में भेज दिया गया। बिजली काटने से कुछ हिस्सों में अंधेरा हो गया और वहां अफरातफरी मच गई।

बड़ा हो सकता था हादसा

जिस इमारत में आग लगी है उसके ग्राउंड फ्लोर तक नहीं पहुंची। वहां 11 हजार किलोवाट का विद्युत सबस्टेशन है। इसमें कई ट्रांसफार्मर्स रखे हैं। अगर यहां तक आग पहुंच जाती तो भयंकर धमाका हो सकता था। इससे इमारत भी ढह सकती थी।

हालातों पर नजर बनाए हुए थे स्वास्थ्य मंत्री

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन खुद इसकी निगरानी कर रहे थे। उन्होंने प्रशासन को विशेष फायर ऑडिट करने के निर्देश दिए हैं।

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Posted By: JP Yadav

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