नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। राष्ट्रीय राजधानी के बार्डर समेत देश के कुछ हिस्सों में कुछ माह से चल रहे कृषि कानून विरोधी आंदोलन के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सरकार को अड़ियल किसान संगठनों को छोड़कर आगे बढ़ने की सलाह दी है। उसने दो टूक कहा है कि इनको लगातार मनाने की हर कोशिशें कर देख लिया गया है। ऐसे में सरकार को देशभर में मौजूद अन्य किसान संगठनों और जुड़े पक्षकारों को बुलाकर और पारदर्शी बातचीत कर विवाद का सर्वमान्य हल निकालना चाहिए। 

संघ का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब तीन माह के करीब पहुंचने जा रहे इस आंदोलन को खत्म कराने की सरकार की हर कोशिशें अब तक विफल साबित हुई हैं और केंद्रीय मंत्रियों से 11 दौर की बातचीत के बाद भी आंदोलनकारी किसान नेता तीनों कानून को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदारी की गारंटी का कानून बनाने व पराली जलाने पर सजा के प्रावधान वाले कानून को वापस लेने समेत अन्य मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार तीनों कानून को निलंबित रखने तथा उसमें आपत्तियों के आधार पर बदलाव करने के साथ ही एमएसपी पर खरीदारी जारी रखने का आश्वासन दे रही है।

सरकार की कोशिश अब भी इनसे बात कर समाधान निकालने की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे बढ़कर कहा है कि आंदोलनरत किसानों से बातचीत के सरकार के दरवाजें हमेशा खुले हुए हैं और बातचीत से ही विवादों का हल निकल सकता है। तो, संघ के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ (बीकेएस) के अखिल भारतीय महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी ने सरकार को चेताते हुए कहा है कि आंदोलनरत किसानों की कुछ मांगें अव्यवहारिक और बेतुके हैं। इनका अड़ियल रवैया भी ठीक नहीं है। अगर इनके आगे सरकार झुक गई तो यह नये प्रकार की समस्या खड़ी करेगा। फिर यह चलन बढ़ जाएगा कि बॉर्डर घेरो और मांगें मनवा लो। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि सरकार को अड़ियल कथित किसान नेताओं की परवाह किए बगैर आगे बढ़ना चाहिए। बाकि समाधान के बाद इन नेताओं से जनता जवाब लेगी।

kumbh-mela-2021

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप