नई दिल्‍ली, पीटीआइ। सिंघु बार्डर पर किसानों के प्रदर्शन स्‍थल पर दलित व्‍यक्ति की हत्‍या के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में दलित व्‍यक्ति की हत्‍या का जिक्र करते हुए शीर्ष अदालत से उस लंबित जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की गुजारिश की गई है जिसमें दिल्ली की सीमाओं से प्रदर्शनकारियों को हटाने की गुहार लगाई की गई है। याचिका में दलील दी गई है कि भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी जीने के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकती है।

स्वाति गोयल और संजीव नेवार ने वकील शशांक शेखर झा के जरिए अपनी लंबित जनहित याचिका में यह अंतरिम याचिका दाखि‍ल की है जिसमें कहा गया है कि यदि इन प्रदर्शनों को ऐसे ही चलते रहने दिया गया तो देश को बड़े पैमाने पर नुकसान होगा। याचिका में केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी तरह के प्रदर्शन रोकने और महामारी खत्म होने तक एसे प्रदर्शनों की इजाजत नहीं देने को लेकर दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक जनहित याचिका में कहा गया है जो प्रदर्शन गैरकानूनी है... और जिसमें मानवता विरोधी कृत्य देखने को मिल रहे हैं... ऐसे प्रदर्शन को जारी रखने नहीं दिया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शनों में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा, एक महिला से दुष्कर्म की वारदात और दशहरा के मौके पर लखबीर सिंह नाम के दलित व्‍यक्ति की हत्या जैसे गंभीर वारदातें देखी गई हैं। 

याचिका में यह भी कहा गया है कि कोरोना संकट के चलते त्योहारों के सीजन में भी जश्न मनाने, मंदिरों में जाने, स्कूल कालेज जाने पर प्रतिबंध है तो ऐसे प्रदर्शनों को इजाजत देना ठीक नहीं होगा। प्रदर्शनकारी अपने साथ देश के लाखों लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। ऐसे में जब महामारी चल रही हो इतने लंबे आंदोलन को अनुमति नहीं दी जा सकती है। सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय से प्रदर्शन किया जाना सर्वोच्‍च अदालत के आदेशों का स्‍पष्‍ट उल्‍लंघन है। यह लोगों के जीने के अधिकार का भी अतिक्रमण कर रहा है।