फरीदाबाद (अनिल बेताब)। दवा निर्माता कंपनी की ओर से सैन्य अस्पताल, जालंधर को जो दवा सप्लाई की गई थी, उसके बिल पर अंकित और दवा के बैच नंबर में अंतर है। यानि सैन्य अस्पताल को किसी और बैच नंबर की दवा सप्लाई की गई और दवा निर्माता कंपनी ने बिल दूसरे बैच नंबर का बना कर फरीदाबाद की दवा वितरक कंपनी को भेज दिया।

यह बात केंद्र और राज्य की औषधि नियंत्रण विभाग की टीम की अब तक की जांच के बाद सामने आ रही है। फरीदाबाद की दवा वितरक कंपनी की ओर से जांच टीम को यह जानकारी दी गई है। अब चूंकि सैन्य अस्पतालों में दवा सप्लाई का टेंडर फरीदाबाद की दवा वितरक कंपनी के पास है, तो ऐसे में ज्यादा जवाबदेही इसी कंपनी की बन रही है।

हालांकि औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के सामने अब तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है कि गड़बड़ लुधियाना की दवा निर्माता कंपनी की है या फिर फरीदाबाद के वितरक की कोई खामी है। फरीदाबाद की दवा वितरक कंपनी के पास वर्ष 2013-14 से दवा कारोबार का लाइसेंस है।

बता दें कि दवाओं में गड़बड़ी की आशंका के चलते सैन्य अस्पताल, जालंधर की ओर से केंद्र को शिकायत दी गई थी। इसके बाद राज्य के औषधि नियंत्रण विभाग को जानकारी दी गई। केंद्र के तीन औषधि नियंत्रक और जिले के दो वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारियों ने पांच जुलाई को फरीदाबाद में दवा कंपनी में छापेमारी की थी।

एक तरफ औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से फरीदाबाद की कंपनी को नोटिस देकर सैन्य अस्पताल को सप्लाई की दवा की खरीद का ब्यौरा मांगा गया है, तो वहीं टीम के अधिकारी लुधियाना की कंपनी के संपर्क में भी हैं। अगर फरीदाबाद की कंपनी ने बैच नंबर के मुताबिक दवा खरीद का सही रिकार्ड नहीं दिखाया, तो विभाग आगे मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करेगा।

विभाग ने वैसे पांच जुलाई को गुणवत्ता की जांच के लिए कई दवाओं के नमूने लिए थे। फरीदाबाद कंपनी के प्रबंधकों का कहना है कि वे अपने स्तर पर रिकार्ड की जांच कर रहे हैं। दवा की गुणवत्ता में कहीं कोई कमी नहीं मिलेगी। राज्य के औषधि नियंत्रण अधिकारी एनके आहूजा ने बताया कि विभागीय जांच पूरी होने में अभी समय लगेगा। अभी तो फरीदाबाद की कंपनी की ओर से दवा खरीद के बिल का इंतजार है।